Amit Shah : नई दिल्ली लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणियों को लेकर बुधवार को संसद में तीखा हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस पर “वोट चोरी” के आरोप लगाते हुए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी का उल्लेख किया, जिस पर कांग्रेस सांसदों ने जोरदार विरोध जताया।
विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे “वोट चोरी” के आरोपों का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में चुनावी गड़बड़ियों के तीन चरण रहे हैं। उन्होंने दिल्ली की एक अदालत में लंबित मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें यह सवाल उठाया गया है कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता मिलने से पहले मतदाता के रूप में पंजीकरण कराया था या नहीं।
“जब कोई पात्र नहीं होता, फिर भी मतदाता बन जाता है, तो वह वोट चोरी का मामला है। कुछ समय पहले दिल्ली की अदालत में एक मामला दर्ज हुआ था, जिसमें यह विवाद है कि सोनिया गांधी नागरिक बनने से पहले ही वोटर कैसे बनीं,” अमित शाह ने कहा।
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उन्होंने यह भी कहा कि एक उदाहरण तब का है जब देश के पहले प्रधानमंत्री के चयन में सरदार पटेल को ज्यादा समर्थन मिलने के बावजूद जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने। दूसरा उदाहरण 1975 का है, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द किया और बाद में प्रधानमंत्री को कानूनी सुरक्षा देने के लिए संसद में कानून लाया गया।
अमित शाह के इन बयानों पर विपक्षी बेंचों से तीखी प्रतिक्रिया आई। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने आपत्ति जताते हुए कहा, “1980 के दशक में सोनिया गांधी के खिलाफ दर्ज मामला अदालत ने खारिज कर दिया था। उन्होंने उस चुनाव में वोट भी नहीं डाला था। गृह मंत्री भ्रामक बयान दे रहे हैं।”
इस पर अमित शाह ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है। “मैंने सिर्फ यह कहा है कि अदालत में एक मामला दर्ज है और नोटिस जारी हुआ है। अंतिम फैसला अदालत करेगी,” उन्होंने कहा।
यह तीखी नोकझोंक संसद में चुनाव सुधारों पर चल रही बहस के दौरान एक और बड़े टकराव का कारण बन गई।
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