नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के खिलाफ जारी मनी लांड्रिंग जांच में 1452 करोड़ रुपये की नई संपत्तियां जब्त की हैं। एजेंसी इससे पहले भी अंबानी समूह की 7500 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है। इस तरह कुल जब्त संपत्ति लगभग 9000 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है।
देश के चार शहरों में संपत्तियाँ जब्त
सूत्रों के मुताबिक, जिन संपत्तियों को अंतरिम रूप से फ्रीज किया गया है, वे नवी मुंबई, चेन्नई, पुणे और भुवनेश्वर में स्थित हैं। कार्रवाई मनी लांड्रिंग (Money Laundring) रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। ईडी ने इस मामले में अगस्त में अनिल अंबानी से पूछताछ भी की थी और उन्हें विदेशी मुद्रा उल्लंघन के एक अन्य मामले में फिर से तलब किया गया है।
पहले भी जब्त की गई बड़ी संपत्ति
ईडी ने इस महीने की शुरुआत में रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस होम फाइनेंस से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच में नवी मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC) की 4462 करोड़ रुपये मूल्य की 132 एकड़ जमीन जब्त की थी।
सीबीआई की एफआईआर पर आधारित है मामला
यह मनी लांड्रिंग जांच सीबीआई की दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धाराएं 120-बी, 406, 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 13(2) व 13(1)(डी) शामिल हैं।
इस एफआईआर में आरकॉम, अनिल अंबानी और अन्य अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
40 हजार करोड़ का कर्ज, 9 बैंकों ने खातों को घोषित किया ‘फ्रॉड’
ईडी के अनुसार, आरकॉम और उसकी सहयोगी कंपनियों ने 2010 से 2012 के बीच घरेलू एवं विदेशी ऋणदाताओं से 40,185 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। बाद में 9 बैंकों ने इन खातों को धोखाधड़ी वाला घोषित कर दिया।
कर्ज की रकम का दुरुपयोग: दूसरे कामों में झोंका गया पैसा
जांच एजेंसी ने पाया कि—
- एक कंपनी द्वारा लिया गया कर्ज दूसरी कंपनियों के कर्ज चुकाने में लगाया गया
- रकम को संबंधित पक्षों को ट्रांसफर किया गया
- बड़ी राशि म्यूचुअल फंड व फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश की गई
- करीब 13,600 करोड़ रुपये डायवर्ट किए गए
- इनमें से 12,600 करोड़ संबंधित पक्षों को, जबकि 1,800 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड और एफडी में लगाए गए
- कुछ धनराशि विदेश भी भेजी गई
ईडी की कार्रवाई से रिलायंस समूह ने किया किनारा
रिलायंस समूह ने बयान जारी कर कहा कि ईडी द्वारा जब्त की गई 1400 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) की है, जो 2019 से समूह का हिस्सा नहीं है।
कंपनी वर्तमान में एनसीएलटी और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही है और इसका प्रबंधन एसबीआई के नेतृत्व में नियुक्त प्रोफेशनल द्वारा किया जा रहा है।
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