चेन्नई । तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी (BJP) की उम्मीदवार सूची में के. अन्नामलाई का नाम नहीं होने से सियासी हलचल तेज हो गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेन्द्रन ने साफ किया कि यह फैसला पार्टी हाईकमान द्वारा लिया गया है।
उम्मीदवार चयन पर बीजेपी का पक्ष
नागेन्द्रन ने बताया कि घोषित 27 उम्मीदवारों की सूची केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से तैयार की गई है और पार्टी को भरोसा है कि सभी उम्मीदवार चुनाव में जीत दर्ज करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह रणनीतिक आधार पर किया गया है। अन्नामलाई को पार्टी का आक्रामक और लोकप्रिय चेहरा माना जाता है, ऐसे में उनका नाम सूची में न होना चर्चा का विषय बन गया है।
प्रचार में निभाएंगे अहम भूमिका
अन्नामलाई ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे चुनावी प्रक्रिया से दूर नहीं हैं, बल्कि पार्टी के लिए सक्रिय रूप से प्रचार करेंगे। उन्हें तमिलनाडु के अलावा पुडुचेरी और केरल (Kerala) में भी प्रचार की अहम जिम्मेदारी दी गई है। इस बीच भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या (BJP MP Tejshwi Surya) ने भी अन्नामलाई की अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि वे पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं और उनका प्रचार अभियान भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगा।
गठबंधन में बीजेपी का दांव
तमिलनाडु में इस बार बीजेपी, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। सीट बंटवारे के तहत कुल 234 सीटों में से AIADMK 178 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि बीजेपी 27 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
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रणनीति के पीछे की वजह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई को टिकट न देने के बावजूद उन्हें प्रचार की जिम्मेदारी सौंपना बीजेपी की व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इससे पार्टी उनके जनाधार का अधिकतम फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।
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