Bihar- सांसद पप्पू यादव व समर्थकों पर एक और एफआईआर दर्ज

By Anuj Kumar | Updated: February 9, 2026 • 12:52 AM

पटना,। बिहार के पूर्णिया सांसद पप्पू यादव (Pappu Yadav) और उनके समर्थकों के खिलाफ बुद्धा कॉलोनी थाना में एक और एफआईआर दर्ज की गई। यह मामला सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस कार्रवाई में रुकावट को लेकर दर्ज किया गया है।

गिरफ्तारी के दौरान समर्थकों से पुलिस की नोकझोंक

बताया जा रहा है कि शुक्रवार देर रात पुलिस सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार करने उनके घर पहुंची थी, लेकिन उस दौरान उन्होंने गिरफ्तारी देने से इनकार कर दिया। इस दौरान सांसद के समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई थी। हालात बिगड़ते देख सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालते हुए बाद में पप्पू यादव को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई।

तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती

गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव को पहले अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें पीएमसीएच शिफ्ट (PMCH Shift) किया गया। उनकी जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी है।

पूर्णिया में जाप कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन

मीडिया रिपोर्ट (Media Report) के मुताबिक, पटना में आधी रात हुई गिरफ्तारी के विरोध में शनिवार को पूर्णिया में जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान जाप कार्यकर्ताओं ने शहर में मशाल जुलूस निकाला और पप्पू यादव को अविलंब रिहा करने की मांग की।

सरकार विपक्ष की आवाज दबा रही: जाप

जन अधिकार पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष बबलू भगत ने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है। सांसद पप्पू यादव लगातार सदन में आम जनता की आवाज उठाते हैं और पीड़ितों को न्याय दिलाते हैं, लेकिन सरकार को यह हजम नहीं होता।

चिराग पासवान बोले- कानूनी प्रक्रिया को साजिश न बताएं

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस मामले पर कहा कि हर चीज को साजिश बताना ठीक नहीं है। गिरफ्तारी एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि कोई दोषी है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा और यदि कोई निर्दोष है तो उस पर कोई आंच नहीं आएगी।

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31 साल पुराने केस में टूटी बेल, हुई गिरफ्तारी

बता दें कि पप्पू यादव को 31 साल पुराने मामले में जमानत टूटने के बाद गिरफ्तार किया गया। यह मामला साल 1995 का है, जो पटना के शास्त्री नगर थाने में दर्ज किया गया था। आरोप है कि 1994 में सांसद बनने के बाद उन्होंने पटना में किराए पर लिया गया मकान कार्यालय में बदल दिया था और मकान खाली नहीं किया गया, जिससे विवाद बढ़ा।

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