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National- अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को मिली बड़ी राहत

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: May 2, 2026 • 5:15 PM
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नई दिल्ली,। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 में दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर नफरत भरे भाषण (Hate Speech) देने के मामले में भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को बड़ी राहत प्रदान की है।

सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

शीर्ष अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि इन नेताओं के बयानों से प्रथम दृष्टया कोई भी संज्ञेय अपराध बनता हुआ प्रतीत नहीं होता है। अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, जबकि प्रवेश वर्मा दिल्ली की राजनीति में सक्रिय प्रमुख चेहरा हैं।

शाहीन बाग प्रदर्शन से जुड़ा मामला

यह पूरा विवाद शाहीन बाग में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के समय का है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) की नेता वृंदा करात और के.एम. तिवारी ने आरोप लगाया था कि जनवरी 2020 में चुनावी रैलियों के दौरान अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा ने अत्यंत भड़काऊ भाषण दिए थे।

एफआईआर की मांग खारिज

याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि पुलिस को इन नेताओं के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के जून 2022 के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।

‘संज्ञेय अपराध नहीं बनता’

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हाईकोर्ट ने स्वतंत्र रूप से सामग्री का आकलन करने के बाद यह माना था कि इन भाषणों से किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा नहीं होता।

हिंसा के उकसावे के साक्ष्य नहीं

कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि ये बयान किसी विशेष समुदाय को लक्षित नहीं थे और न ही इनसे हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाने का उकसावा मिला।

रिकॉर्ड के आधार पर फैसला

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री और निचली अदालत के समक्ष पेश स्टेटस रिपोर्ट पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद वह इसी निष्कर्ष पर पहुंची है कि कार्रवाई का कोई आधार नहीं है।

कानूनी प्रक्रिया पर टिप्पणी

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए यह भी साफ किया कि एफआईआर दर्ज करने या जांच शुरू करने के लिए पूर्व मंजूरी (सेंक्शन) की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि यह केवल संज्ञान लेने के लिए अनिवार्य है।

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हेट स्पीच पर अदालत की टिप्पणी

अदालत ने अपने 125 पन्नों के फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि नफरत भरे भाषण संवैधानिक मूल्यों और भाईचारे के खिलाफ हैं, लेकिन वर्तमान कानूनी व्यवस्था इस मुद्दे से निपटने में सक्षम है और इस विशिष्ट मामले में दखल देने की आवश्यकता नहीं है।

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