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Jammu &Kashmir- सेना ने बदली रणनीति, घाटियों में छिपे आतंकियों पर शिकंजा

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: December 28, 2025 • 5:27 PM
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नई दिल्ली,। सेना ने पहली बार रणनीति बदलते हुए डोडा और किश्तवार में शीतकालीन अभियानों को तेज कर दिया है। जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के सबसे ठंडे हफ्तों में बचे हुए आतंकवादी समूहों को खदेड़ने के उद्देश्य से घाटियों, मध्य पर्वतीय क्षेत्रों और ऊंचाई वाले इलाकों में एक साथ तैनाती की जा रही है।

चिल्लई कलां में बढ़ाई गई सुरक्षा मौजूदगी

यह अभियान चिल्लई कलां के साथ मेल खाता है, जो 21 दिसंबर से 31 जनवरी तक चलने वाली सबसे भीषण सर्दी का समय होता है। इसका उद्देश्य बर्फ से ढके उन इलाकों में सुरक्षा उपस्थिति बढ़ाना है, जिनका इस्तेमाल आतंकवादी अब तक घुसपैठ या छिपने के लिए करते रहे हैं।

ऊंचाई वाले इलाकों में आक्रामक गश्त

मीडिया रिपोर्ट्स (Media Reports) में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि हाल के दिनों में सेना की इकाइयां अधिक ऊंचाई वाली पर्वत श्रृंखलाओं पर आक्रामक गश्त कर रही हैं, ताकि क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र समूहों को कोई सुरक्षित ठिकाना न मिल सके।

आधुनिक तकनीक और शीतकालीन उपकरणों की तैनाती

अभियान में आधुनिक निगरानी तकनीक से लैस विशेष शीतकालीन उपकरणों के साथ अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया है। इससे कठिन मौसम और दुर्गम इलाकों में भी प्रभावी ऑपरेशन संभव हो पा रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों के बीच मजबूत तालमेल

सेना इस अभियान का नेतृत्व नागरिक प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ (CRPF) विशेष अभियान दल, वन रक्षकों और ग्राम रक्षा रक्षकों के साथ मिलकर कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, जमीनी इकाइयों और खुफिया नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल से प्रतिक्रिया समय कम हुआ है।

जम्मू क्षेत्र में 30–35 सक्रिय आतंकवादी

सूत्रों ने बताया कि मौजूदा आकलन के अनुसार जम्मू क्षेत्र में 30 से 35 सक्रिय आतंकवादी मौजूद हैं, जिनमें से कई पकड़े जाने से बचने के लिए ऊंचे या मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में छिपे हुए हैं। ग्रामीणों से भोजन और आश्रय के लिए जबरन वसूली की शिकायतें भी सामने आई हैं।

नई रणनीति: पहले सुरक्षित, फिर निगरानी

नई रणनीति के तहत सैनिक पहले जमीनी गश्त के जरिए इलाकों को सुरक्षित करते हैं और उसके बाद आतंकवादियों की घुसपैठ या गतिविधियों को रोकने के लिए निरंतर निगरानी रखी जाती है।

शीतकालीन युद्ध में प्रशिक्षित विशेष इकाइयां

विशेष रूप से प्रशिक्षित शीतकालीन युद्ध उप-इकाइयों को अहम क्षेत्रों में तैनात किया गया है। ये सैनिक उच्च ऊंचाई पर जीवित रहने, बर्फ में नेविगेशन, हिमस्खलन से निपटने और कड़ाके की ठंड में युद्ध करने में माहिर हैं।

ड्रोन और थर्मल इमेजिंग से कड़ी नजर

सेना शीतकालीन ग्रिड को मजबूत करने के लिए ड्रोन आधारित टोही, जमीनी सेंसर, निगरानी रडार, थर्मल इमेजिंग उपकरण और अन्य मानवरहित प्रणालियों का भी इस्तेमाल कर रही है, जिससे आतंकियों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सके।

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