Latest Hindi News : अस्त्र-2 मिसाइल : दुश्मन के लिए घातक- रफ्तार 6,000 किमी/घंटा

By Anuj Kumar | Updated: October 19, 2025 • 10:46 AM

21वीं सदी में रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास-ईरान संघर्षों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के परिदृश्य को बदल दिया है। दुनिया के कई देश आधुनिक हथियार प्रणालियों की खरीद और विकास में जुटे हैं। भारत भी देसी तकनीक से मिसाइल और फाइटर जेट (Fighter Jet) बनाने की मुहिम तेज कर चुका है। मीडिया रिपोर्ट (Media Report) के मुताबिक, मिसाइल रक्षा कार्यक्रम में भारत लगातार नई उन्नत तकनीकें जोड़ रहा है।

बरामदगी और प्रारंभिक विश्लेषण

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान पाकिस्तान द्वारा दागी गई चीन निर्मित पीएल-15ई एयर-टू-एयर मिसाइल पंजाब के होशियारपुर में एक खेत में बरामद हुई थी। मिसाइल फटी नहीं थी और सुरक्षा कारणों से डीआरडीओ ने इसे गंभीरता से विश्लेषित किया। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने पीएल-15 के घटकों और टेक्नोलॉजी का परीक्षण करके रिपोर्ट तैयार की है।

पीएल-15 की प्रमुख तकनीकें

डीआरडीओ की रिपोर्ट के मुताबिक पीएल-15 में मिनिएचर एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैनड एरे (AESA) रडार, हाई-एनर्जी प्रोपेलेंट (जो मिसाइल को मैक 5 यानी ~6,000 किमी/घंटा से अधिक रफ्तार देने में सक्षम बनाता है) और उन्नत एंटी-जैमिंग तकनीक मौजूद हैं। इन विशेषताओं ने पीएल-15 को तकनीकी रूप से सक्षम हार्ड-टू-डिफेट सिस्टम बनाया है।

अस्त्र-2 में समावेशन

रिपोर्ट के आधार पर डीआरडीओ अब पीएल-15 की इन उन्नत विशेषताओं को अस्त्र मार्क-2 परियोजना में शामिल करने की दिशा में काम कर रहा है। यदि सफलतापूर्वक लागू हुआ, तो अस्त्र-2 की रफ्तार और टोही-सुरक्षा क्षमताएँ काफी बढ़ सकती हैं, जिससे यह भविष्य की सशस्त्र मुठभेड़ों में अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।

क्षेत्रीय परिस्थितियाँ और पाकिस्तान की कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान भी अपने हथियार भंडार को मजबूत करने में सक्रिय है — लॉन्ग-रेंज पीएल-17 मिसाइलें, तुर्की से कामिकाज़े ड्रोन और अन्य उन्नत हथियारों की तलाश में है। यह क्षेत्रीय हथियार प्रतियोगिता की तीव्रता को दर्शाता है।

भारतीय रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन और आगे की रणनीति

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय प्रणालियों — ब्रह्मोस, रैम्पेज और स्कल्प — ने ठोस प्रदर्शन दिखाया। साथ ही भारतीय वायुसेना संख्या की कमी से निपटने और भविष्य की चुनौतियों के लिए राफेल विमानों के लिए अतिरिक्त मेटियोर मिसाइलों की खरीद की योजना बना रही है। डीआरडीओ ने नेक्स्ट-जनरेशन ब्रह्मोस (800 किमी रेंज) जैसी परियोजनाओं पर भी काम तेज कर रखा है, जिससे पूरे क्षेत्र को कवर करने की क्षमता बढ़ेगी।

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