Bareilly : बंदरों ने किया हमला, छत से गिरकर बच्ची की मौत

By Surekha Bhosle | Updated: March 6, 2026 • 12:54 PM

बरेली में बंदरों के आतंक के कारण एक दर्दनाक हादसा हो गया. छत पर होली खेल रही तीन साल की बच्ची बंदरों को देखकर डर गई और भागते समय संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर गई. गंभीर चोट लगने के कारण अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

उत्तर प्रदेश के बरेली (Bareilly) से एक दर्दनाक घटना सामने आई है. जिले में इज्जतनगर थाना क्षेत्र के गांव मुड़िया अहमदनगर में बंदरों के आतंक के कारण एक मासूम बच्ची की जान चली गई. तीन साल की बच्ची छत पर खेल रही थी, तभी बंदरों का एक झुंड उस पर झपट पड़ा. बंदरों को देखकर बच्ची घबरा गई और डरकर भागने लगी. इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे सड़क पर गिर गई. गंभीर चोट लगने के कारण बच्ची की मौत हो गई. इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

बरेली में बताया जा रहा है कि गांव में होली का माहौल था. घरों में बच्चे खेल रहे थे. इसी बीच (Arjun Sahu) अर्जुन साहू की तीन वर्षीय बेटी आकांक्षा उर्फ तनिष्का अपने घर की छत पर बच्चों के साथ होली खेल रही थी. बच्चों के हाथ में गुलाल और रंग थे और वे आपस में खुशी-खुशी खेल रहे थे।

उसी समय बंदरों का एक झुंड वहां आ गया. बच्चों को देखकर बंदर इधर-उधर कूदने लगे. तनिष्का के हाथ में गुलाल की थैली थी. एक बंदर ने उसी थैली को देखकर उसकी तरफ झपट्टा मारा और उसे डराने लगा. अचानक हुए इस हमले से बच्ची बुरी तरह घबरा गई।

डर के कारण बिगड़ा संतुलन

बंदर को पास आते देख तनिष्का डरकर पीछे हटने लगी. घबराहट में वह तेजी से भागी, लेकिन छत पर भागते समय उसका संतुलन बिगड़ गया. इससे वह सीधे नीचे सड़क पर गिर गई. गिरने के कारण उसके सिर में गंभीर चोट लग गई और काफी खून बहने लगा।

बच्ची की चीख सुनकर घर के लोग तुरंत छत और सड़क की ओर दौड़े. जब उन्होंने बच्ची को जमीन पर घायल हालत में देखा तो तुरंत उसे उठाकर शहर के एक निजी अस्पताल ले गए. परिवार वालों को उम्मीद थी कि डॉक्टर बच्ची को बचा लेंगे, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

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यह खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया. बच्ची की मां ममता को जैसे ही बेटी की मौत की जानकारी मिली, वह बेहोश हो गईं. गांव में मातम पसरा हुआ है।

आंगनबाड़ी में पढ़ती थी बच्ची

बरेली में ग्रामीणों ने बताया कि तनिष्का के पिता अर्जुन साहू मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं. उनके परिवार में दो बेटियां हैं. तनिष्का दूसरे नंबर की बेटी थी. वह गांव के ही आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने जाती थी और काफी चंचल स्वभाव की थी।

गांव के लोगों का कहना है कि बच्ची सभी की चहेती थी. उसकी मौत से पूरा गांव दुखी है. कई घरों में इस घटना के बाद खाना तक नहीं बना।

बंदरों के बढ़ते आतंक से परेशान

इस घटना के बाद गांव के लोगों में काफी गुस्सा भी है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. बंदर अक्सर घरों की छतों पर आ जाते हैं और लोगों को डराते हैं. कई बार वे बच्चों और बुजुर्गों पर झपट्टा भी मार देते हैं।

ग्राम प्रधान धर्मेंद्र पटेल ने बताया कि गांव में बंदरों की समस्या काफी समय से बनी हुई है. कई बार संबंधित विभागों से शिकायत भी की गई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. उनका कहना है कि अगर समय रहते बंदरों को पकड़ने का अभियान चलाया गया होता तो शायद यह दुखद घटना नहीं होती।

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