एक्सिओम-4 मिशन इंडिया: इंडिया पहली बार Axiom-4 मिशन के जरिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुंचेगा। इस मिशन के लिए इंडिया ने 60-70 मिलियन डॉलर का खर्च किया है। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला इस मिशन का भागीदारी होंगे।
Axiom-4 एक प्राइवेट कमर्शियल फ्लाइट है, भीतर भारतीय वैज्ञानिक NASA और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के साथ मिलकर 7 प्रमुख वैज्ञानिक प्रयोगों का अगुआई करेंगे।
Axiom-4 मिशन के तहत किए जाएंगे ये प्रमुख प्रयोग
भारतीय वैज्ञानिक माइक्रोग्रैविटी में मानव के आचरण और तकनीकी इंटरफेस पर अनुसंधान कर रहे हैं। एक प्रयोग में यह तफ़्तीश किया जाएगा कि अंतरिक्ष में इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले से कैसे इंटरैक्ट किया जाता है।
इससे भावी काल के अंतरिक्ष हस्तकला के कंप्यूटर सिस्टम को और अधिक उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया जा सकेगा।
मसल लॉस और फसल उगाने पर अनुसंधान
ISRO और NASA मिलकर “माइक्रोग्रैविटी में मांसपेशी पुनर्जनन” पर अनुसंधान कर रहे हैं। इसका मकसद लंबी कालावधि के मिशनों में मांसपेशियों के हानि को रोकना है। साथ ही, अंतरिक्ष में सलाद के बीज उगाने का भी प्रयोग किया जाएगा, जिससे भावी काल के अंतरिक्ष मुसाफिर के लिए खाद्य स्रोत मुस्तैद किया जा सके।
एक्सिओम-4 मिशन इंडिया: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में इंडिया का भविष्य
Axiom-4 मिशन इंडिया के लिए केवल एक आरंभ है। इसके बाद इंडिया 2026-27 तक अपने स्वयं के अंतरिक्ष पथिक को भेजने और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की स्कीम पर काम कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के मुताबिक, 2040 तक इंडिया का लक्ष्य चंद्रमा पर भारतीय को उतारना है। Axiom-4 मिशन इस दीर्घकालिक पथिक का एक अवश्यकरण कदम है।