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National-बांग्लादेश के विदेश मंत्री भारत आएंगे, गंगाजल संधि और ईंधन संकट पर होगी बातचीत

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: March 31, 2026 • 11:18 AM
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नई दिल्ली । बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान (Khalilur Rahman) अगले सप्ताह भारत के दौरे पर आ रहे हैं। कार्यभार संभालने के बाद यह उनका पहला विदेश दौरा है, जिसे दक्षिण एशिया की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दौरे का एजेंडा: उच्च स्तरीय बैठकें

सूत्रों के अनुसार, रहमान इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए मॉरीशस जाते समय नई दिल्ली में रुकेंगे। इस दौरान 8 अप्रैल को वे भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S Jaishankar) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (Ajit Dobhal) और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ उच्च स्तरीय बैठकों में शामिल होने की संभावना है।

ऊर्जा संकट और ईंधन आपूर्ति

बांग्लादेश की प्राथमिकता अपने देश में गहराते ऊर्जा संकट का समाधान तलाशना भी है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण बांग्लादेश में ईंधन की भारी किल्लत पैदा हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, खलीलुर रहमान भारत से अतिरिक्त ईंधन, विशेष रूप से डीजल की आपूर्ति की मांग करेंगे। भारत पहले भी संकट के समय बांग्लादेश को डीजल की खेप भेजकर मदद कर चुका है।

गंगा जल संधि का नवीनीकरण

इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा 1996 की गंगा जल संधि का नवीनीकरण है। 30 साल की अवधि के लिए हस्ताक्षरित इस संधि की मियाद दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है। दोनों देशों ने इसके नवीनीकरण के लिए पहले ही चर्चा शुरू कर दी है और हाल ही में पद्मा व गंगा नदियों पर संयुक्त जल मापन की प्रक्रिया भी की गई है।

रणनीतिक और वैश्विक महत्व

यह दौरा इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की नई सरकार के किसी वरिष्ठ नेता की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। खलीलुर रहमान इससे पहले अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके हैं और अब नई सरकार में विदेश मंत्री के रूप में उनकी यह यात्रा भारत-बांग्लादेश संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

वे इस दौरे में वर्ष 2026-2027 के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्षता के लिए बांग्लादेश की उम्मीदवारी भी पेश करेंगे और भारत का समर्थन हासिल करने की कोशिश करेंगे।

भविष्य में भारत-बांग्लादेश रणनीतिक साझेदारी

कुल मिलाकर, यह दौरा न केवल द्विपक्षीय व्यापार और संसाधन साझाकरण के लिए अहम है, बल्कि भविष्य में भारत-बांग्लादेश के बीच रणनीतिक साझेदारी की नई दिशा तय कर सकता है। वैश्विक भू-राजनीति में हो रहे बदलावों के बीच दोनों देशों के नेताओं की यह मुलाकात पूरे क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

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