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Barrier-less Toll: भारत का पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू

Author Icon By Dhanarekha
Updated: May 2, 2026 • 6:54 PM
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मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक का आगाज

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात के सूरत-भरूच सेक्शन (NH-48) पर चोर्यासी टोल प्लाजा पर भारत का पहला ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ सिस्टम लॉन्च किया है। इस अत्याधुनिक तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि अब वाहनों को टोल देने के लिए कतार में खड़े होने या रुकने की जरूरत नहीं होगी। यह सिस्टम पूरी तरह से बैरियर-मुक्त है, जिससे वाहन बिना अपनी गति कम किए सीधे टोल पॉइंट से गुजर सकते हैं

एआई कैमरे और 120 किमी की रफ्तार

यह सिस्टम अत्याधुनिक एआई (AI) कैमरों और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक पर आधारित है। ये हाई-परफॉर्मेंस कैमरे 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती गाड़ियों की नंबर प्लेट को भी सटीकता से स्कैन कर सकते हैं। इसके साथ ही RFID रीडर वाहन के FASTag को रीड करते हैं और रियल टाइम में टोल की राशि खाते से कट जाती है। यदि किसी वाहन में FASTag नहीं है, तो नंबर प्लेट के आधार पर सीधे ई-नोटिस भेजने की सुविधा भी इसमें शामिल है।

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समय, ईंधन और पर्यावरण की बचत

इस नई प्रणाली के लागू होने से न केवल यात्रा के समय में भारी कमी आएगी, बल्कि हाईवे पर लगने वाले लंबे जाम से भी मुक्ति मिलेगी। वाहनों के न रुकने के कारण ईंधन की कम खपत होगी, जिससे वाहन प्रदूषण में भी गिरावट आएगी। यह कदम भारत के टोलिंग सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने और लॉजिस्टिक्स की आवाजाही को तेज कर व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम (MLFF) पारंपरिक टोल प्लाजा से कैसे अलग है?

पारंपरिक टोल प्लाजा पर वाहनों को फिजिकल बैरियर के सामने रुकना पड़ता है, जबकि MLFF सिस्टम में कोई बैरियर नहीं होता। यहाँ वाहन 120 किमी/घंटा तक की गति से बिना रुके गुजर सकते हैं और सेंसर व एआई कैमरों के जरिए टोल अपने आप कट जाता है।

यदि किसी गाड़ी पर FASTag न लगा हो, तो यह सिस्टम कैसे काम करेगा?

यदि वाहन पर FASTag नहीं लगा है या वह काम नहीं कर रहा है, तो सिस्टम के हाई-टेक एआई कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन कर लेंगे और वाहन मालिक को सीधे ई-नोटिस (E-Notice) भेज दिया जाएगा।

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