नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने हाल ही में दुनिया की सबसे सुविधाजनक ट्रेनों में शुमार वंदे भारत स्लीपर (Vande Bharat Sleeper) को पटरी पर उतारकर वैश्विक स्तर पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि न केवल भारत की तकनीकी प्रगति को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि भारत विकसित देशों को टक्कर देने में सक्षम है।
अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं, लेकिन दुनिया में सबसे कम किराया
इस अत्याधुनिक ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं होने के बावजूद किराया दुनिया में सबसे कम रखा गया है। आराम, सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के मामले में यह ट्रेन ग्लोबल स्टैंडर्ड पर खरी उतरती है।
आम यात्रियों को ध्यान में रखकर बना प्राथमिकता मॉडल
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रेलवे (Indian Railway) का प्राथमिकता मॉडल आम जनता को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग सुरक्षित, तेज और किफायती यात्रा कर सकें।
प्रति यात्री लगभग 45 प्रतिशत सब्सिडी
भारतीय रेलवे वर्तमान में प्रत्येक यात्री को टिकट की वास्तविक लागत पर लगभग 45 प्रतिशत की भारी सब्सिडी दे रहा है। यानी अगर कोई यात्री 100 रुपये का टिकट खरीदता है, तो उसकी वास्तविक यात्रा लागत करीब 145 रुपये होती है, जिसमें 45 रुपये का भार सरकार उठाती है।
एक साल में 60,466 करोड़ रुपये की सब्सिडी
वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान रेलवे ने यात्री टिकटों पर कुल 60,466 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी। इसके अलावा दिव्यांगजनों, गंभीर रोगियों और छात्रों जैसी विशेष श्रेणियों को इस सब्सिडी के ऊपर अतिरिक्त रियायतें भी दी जाती हैं।
दुनिया के मुकाबले भारत में सबसे सस्ती रेल यात्रा
अंतरराष्ट्रीय तुलना में भारतीय रेलवे की यात्रा लागत सबसे किफायती साबित होती है। पड़ोसी देशों पाकिस्तान और श्रीलंका में साधारण श्रेणी का किराया भारत से करीब ढाई गुना अधिक है। वहीं विकसित देशों की बात करें, तो भारत में वंदे भारत जैसी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों (Semi High speed Train) का किराया जापान की तुलना में नौ गुना और चीन से तीन गुना कम है।
किराया बढ़ोतरी में दिखा संयम
किराया वृद्धि के मोर्चे पर भी रेलवे ने संतुलित रुख अपनाया है। वर्ष 2025-26 में करीब पांच साल बाद बेहद मामूली बढ़ोतरी की गई है।
1 जुलाई 2025 से लागू नई दरें
नई दरों के अनुसार, द्वितीय श्रेणी साधारण में 500 किलोमीटर तक की यात्रा के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। लंबी दूरी की यात्राओं में प्रति किलोमीटर केवल आधा पैसा बढ़ाया गया है।
स्लीपर और प्रथम श्रेणी में भी आधा पैसा, मेल-एक्सप्रेस के नॉन-एसी डिब्बों में एक पैसा और एसी श्रेणियों में मात्र दो पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि की गई है।
आधुनिकीकरण और सुरक्षा पर फोकस
रेलवे के अनुसार, इस मामूली बढ़ोतरी का उद्देश्य आधुनिकीकरण और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना है, ताकि यात्रियों को भविष्य में और अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और विश्वस्तरीय सफर मिल सके।
Read More :