Latest Hindi News : पूर्वी सीमा पर बड़ा कदम, देश में बन रहे तीन नए डिफेंस ठिकाने

By Anuj Kumar | Updated: December 1, 2025 • 10:40 AM

नई दिल्ली,। केंद्र सरकार सिलीगुड़ी कॉरिडोर (Siligudi Corridor) जिसे चिकन नेक भी कहा जाता है, यहां तीन नए मिलिट्री बेस बनाने पर काम कर रही है। यह कॉरिडोर भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्यों को बाकी देश से जोड़ने वाली करीब 22 किलोमीटर चौड़ी एक पतली पट्टी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब चीन, बांग्लादेश के साथ मिलकर इस संवेदनशील क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। भारत का यह कदम स्ट्रेटेजिक पोजीशन में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

तीन नए सैन्य ठिकानों का निर्माण तेज

भारत अपनी पूर्वी सीमा को मजबूत करने इन तीन नए सैन्य ठिकानों—लचित बोरफुकन मिलिट्री स्टेशन, फॉरवर्ड बेस और एक अन्य फॉरवर्ड बेस—का निर्माण कर रहा है। ये बेस सिर्फ रक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि रैपिड डिप्लॉयमेंट फोर्स, इंटेलिजेंस यूनिट (Intelijence Unit) और पैरा स्पेशल फोर्स से भी लैस होंगे। इनका उद्देश्य सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को अभेद्य बनाना है।

चोपड़ा बेस: बांग्लादेश सीमा से मात्र 1 किमी दूर

चोपड़ा में बन रहा सैन्य इंस्टॉलेशन बांग्लादेश (Bangladesh) की सीमा से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। इससे बॉर्डर की निगरानी और जरूरत पड़ने पर सेना की तेज मोबिलाइजेशन और अधिक प्रभावी हो जाएगी।

ग्लादेश–चीन की बढ़ती नजदीकी पर भारत की नजर

भारत का यह सैन्य विस्तार बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलावों और पड़ोसी देश की चीन के साथ बढ़ती सैन्य साझेदारी की प्रतिक्रिया माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश 2.2 बिलियन डॉलर के चीनी J-10C फाइटर जेट खरीदने और ड्रोन तकनीक विकसित करने के लिए बीजिंग से सहयोग कर रहा है। पाकिस्तान ने भी JF-17 ब्लॉक C जेट्स की पेशकश की है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर—भारत का सबसे संवेदनशील लिंक

भारत के लिए इस कॉरिडोर की रणनीतिक अहमियत बेहद बड़ी है। नॉर्थ-ईस्ट के 45 मिलियन से अधिक लोगों को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला यह क्षेत्र यदि असुरक्षित हुआ तो देश के सामने गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

राफेल, ब्रह्मोस और एयर डिफेंस सिस्टम से बढ़ी ताकत

नए सैन्य ठिकानों के अलावा भारत ने इस क्षेत्र में राफेल फाइटर जेट्स, ब्रह्मोस मिसाइलें और एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए हैं। यह संकेत है कि भारत अब केवल रक्षात्मक रणनीति नहीं, बल्कि सक्रिय सैन्य प्रभुत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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