पटना। गणतंत्र दिवस समारोह के तहत रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘भारत पर्व’ (India Festival) में इस बार बिहार की झांकी को विशेष स्थान मिला है। भारत पर्व में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की चयनित झांकियों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक विविधताओं को प्रदर्शित किया जाता है। इस साल बिहार की झांकी का चयन मखाना पर किया गया है और इसका प्रदर्शन नई दिल्ली के लालकिला में किया जाएगा।
बिहार की झांकी का थीम: ‘मखाना: लोकल से ग्लोबल’
बिहार की झांकी का थीम है ‘मखाना: लोकल से ग्लोबल (Local to Global) तक’। भारत पर्व का उद्देश्य ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना के साथ राज्यों की विशिष्ट पहचान, परंपरागत ज्ञान, आजीविका के स्रोत और आधुनिक विकास की यात्रा को जोड़ना है।
इस वर्ष बिहार की झांकी का विषय है: ‘मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड’।
मखाना: बिहार का सफेद सोना, अब दुनिया की थाली में
बिहार का मखाना, जिसे ‘सफेद सोना’ भी कहा जाता है, अब मिथिलांचल के पोखर से निकलकर सुपरफूड की पहचान के साथ दुनिया भर में पहुंच रहा है। यह लोकल हुनर का ग्लोबल चेहरा बन चुका है।
भारत को दुनिया की मखाना आपूर्ति में बड़ा योगदान
भारत दुनिया की कुल मखाना आपूर्ति का अधिकांश हिस्सा देता है, जिसमें बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85–90 प्रतिशत है। मिथिला मखाना को वर्ष 2022 में जीआई टैग (GI Tag) भी मिला है, जिससे इसे वैश्विक बाजार में विशिष्ट पहचान मिली है।
झांकी में मखाना की पूरी यात्रा का चित्रण
झांकी की दृश्य संरचना में मखाना की पूरी यात्रा को दो भागों में दर्शाया गया है।
- पहले भाग में कमल के पत्तों के बीच उभरा सफेद ‘लावा मखाना’, जीआई टैग का प्रतीक और किनारों पर मिथिला पेंटिंग की बॉर्डर दिखेगी।
- दूसरे भाग में मखाना की कटाई, बीज संग्रह, ग्रेडिंग, भुनाई, फोड़ाई, पैकिंग और क्वालिटी चेक की पूरी प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया है।
पारंपरिक श्रम और महिला सहभागिता का संदेश
झांकी में एक ओर मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कढ़ाही में मखाना भूनती महिला और दूसरी ओर लकड़ी के मूसल से मखाना के दाने को फोड़ता पुरुष दिखाया गया है। यह दृश्य पारंपरिक श्रम, महिला सहभागिता और स्थानीय कौशल को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
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मखाना: केवल कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि विरासत और उद्यमिता
यह झांकी यह संदेश देती है कि मखाना केवल एक कृषि उत्पाद नहीं है, बल्कि यह विरासत, श्रम, महिला भागीदारी और उद्यमिता का संगम है, जो बिहार को सीधे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है।
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