BSF: BSF का ‘खतरनाक’ प्लान: सांप और मगरमच्छ करेंगे घुसपैठियों का सामना

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प्राकृतिक बाड़: सरीसृपों की तैनाती का प्रस्ताव

नई दिल्ली: भारत-बांग्लादेश सीमा के उन हिस्सों में जहाँ कटीले तार (Fencing) लगाना भौगोलिक रूप से कठिन है, विशेषकर नदी वाले इलाकों में, अब सांपों और मगरमच्छों को तैनात करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अपनी फील्ड यूनिट्स को निर्देश दिए हैं कि वे संवेदनशील जल क्षेत्रों में इन सरीसृपों (Reptiles) के उपयोग की संभावनाओं को टटोलें। यह प्रस्ताव गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के बाद चर्चा में आया है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक तरीके से घुसपैठ और आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाना है

तस्करी और घुसपैठ पर लगाम लगाने की कोशिश

बांग्लादेश से लगी पूर्वी सीमा का एक बड़ा हिस्सा बाढ़-संभावित और दलदली है, जिसका फायदा उठाकर तस्कर अक्सर सोने और अन्य सामानों की तस्करी करते हैं। हाल ही में जनवरी 2026 में नदिया जिले में 1 करोड़ रुपये के सोने के बिस्किट जब्त किए गए थे। चूंकि इन इलाकों में मैन्युअल गश्त और बाड़ लगाना चुनौतीपूर्ण है, इसलिए ‘ऑपरेशनल’ नजरिए से सांप और मगरमच्छ एक प्रभावी मनोवैज्ञानिक और शारीरिक बाधा बन सकते हैं, जो घुसपैठियों के मन में डर पैदा करेंगे।

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सुरक्षा के साथ जुड़ी चुनौतियां

हालांकि यह योजना अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चिंता सीमा के दोनों ओर रहने वाली स्थानीय आबादी की सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि बाढ़ के समय ये जीव रिहायशी इलाकों में घुस सकते हैं। इसके अलावा, इतनी बड़ी संख्या में सांपों और मगरमच्छों की व्यवस्था करना और उन्हें एक निश्चित दायरे में बनाए रखना भी एक कठिन कार्य होगा। फिलहाल BSF मुख्यालय ने केवल संभावनाओं की जांच के निर्देश दिए हैं और इसे अभी तक जमीन पर लागू नहीं किया गया है।

BSF बांग्लादेश सीमा पर सांप और मगरमच्छों का उपयोग क्यों करना चाहता है?

सीमा का एक बड़ा हिस्सा नदियों और दलदलों से घिरा है जहाँ स्थायी बाड़ लगाना असंभव है। घुसपैठियों और तस्करों को इन रास्तों का उपयोग करने से रोकने के लिए सांप और मगरमच्छ एक ‘नेचुरल बैरियर’ के रूप में काम कर सकते हैं।

इस योजना को लागू करने में सबसे बड़ी बाधा क्या है?

सबसे बड़ी बाधा स्थानीय निवासियों की सुरक्षा है। नदी किनारे घनी आबादी होने के कारण इन खतरनाक जीवों से आम लोगों और मवेशियों को जान का खतरा हो सकता है, विशेषकर मानसून और बाढ़ के दौरान।

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