लोकसभा में अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा (Yashwant Verma) ने आरोपों पर जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। कैश कांड (Cash Scandal) की जांच के लिए गठित संसदीय समिति ने उन्हें 6 सप्ताह का समय देने का फैसला किया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि इसके बाद किसी भी तरह का समय विस्तार नहीं दिया जाएगा।
जांच समिति का गठन और प्रस्ताव
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Speaker Om Birla) ने 12 अगस्त को जांच समिति का गठन किया था। जस्टिस वर्मा को हटाने के समर्थन में लाए गए प्रस्ताव पर 146 सांसदों के हस्ताक्षर थे। 5 दिसंबर को हुई कार्यवाही के दौरान जस्टिस वर्मा ने 8 सप्ताह का अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था, लेकिन समिति ने उन्हें केवल 6 सप्ताह का अंतिम अवसर देने का निर्णय लिया
जांच समिति और सबूतों का विवरण
जांच समिति ने आरोपों के समर्थन में सबूतों के साथ मेमो ऑफ चार्जेस दाखिल किया है। इसमें दिल्ली पुलिस और अग्निशमन विभाग द्वारा 14 और 15 मार्च की रात आग बुझाने के दौरान बनाए गए वीडियो, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेज शामिल हैं।
जस्टिस वर्मा का पक्ष और समिति का रुख
लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित समिति की कार्यवाही में जस्टिस वर्मा को अपना पक्ष रखने, आरोपों पर सफाई देने और गवाह पेश करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। हालांकि, समिति पहले ही जस्टिस वर्मा की दलील को अस्वीकार कर चुकी है कि कैश उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से रखा गया था।
सबूत और इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण
समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि नई दिल्ली स्थित 30 तुगलक क्रीसेंट के स्टोररूम में नकदी मौजूद थी। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को केंद्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशाला द्वारा प्रमाणित किया गया। 15 मार्च की सुबह जले हुए 500 रुपये के नोटों की गड्डियों को ‘भरोसेमंद नौकरों’ की मदद से साफ किया गया और यह प्रक्रिया जस्टिस वर्मा के निजी सचिव की मौजूदगी में हुई।
समिति के सदस्य
लोकसभा समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य शामिल हैं। वहीं, 22 मार्च को गठित अलग समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अनु शिवरमन शामिल थे।
जस्टिस यशवंत वर्मा कौन हैं?
यशवंत वर्मा (जन्म 6 जनवरी 1969) एक भारतीय न्यायाधीश हैं जो वर्तमान में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कार्यरत हैं। इससे पहले उन्होंने अक्टूबर 2021 से अप्रैल 2025 तक दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया था।
जस्टिस वर्मा समिति क्या है?
23 जनवरी 2013 को, महिलाओं के विरुद्ध गंभीर यौन उत्पीड़न करने वाले अपराधियों के लिए शीघ्र सुनवाई और कड़ी सज़ा सुनिश्चित करने हेतु आपराधिक कानून में संभावित संशोधनों पर विचार करने हेतु न्यायमूर्ति वर्मा समिति का गठन किया गया था।
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