National- ब्लड डोनेशन गाइडलाइन पर केंद्र का सख्त रुख, ट्रांसजेंडर को अभी नहीं मिली अनुमति

By Anuj Kumar | Updated: March 13, 2026 • 1:17 PM

नई दिल्ली,। केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में रक्तदान से जुड़े दिशा-निर्देशों का बचाव करते हुए कहा है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, समलैंगिक पुरुषों और महिला सेक्स वर्कर्स को संभावित रक्तदाताओं की सूची से बाहर रखने का फैसला वैज्ञानिक तथ्यों और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह किसी समुदाय के खिलाफ भेदभाव नहीं बल्कि सुरक्षित रक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती कदम है।

सरकार ने यह पक्ष सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ के सामने रखा। सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय रक्त नीति का मुख्य उद्देश्य सबसे सुरक्षित डोनर पूल से रक्त प्राप्त करना है, ताकि मरीजों को संक्रमण के खतरे से बचाया जा सके।

संक्रमण के ज्यादा जोखिम का हवाला

सरकार ने अदालत को बताया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों और विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि कुछ विशेष समूहों में एचआईवी (HIV) सहित अन्य संक्रामक रोगों का खतरा सामान्य आबादी की तुलना में काफी अधिक है। सरकार के अनुसार इन समूहों में संक्रमण का जोखिम सामान्य लोगों के मुकाबले लगभग 6 से 13 गुना तक अधिक पाया गया है। ऐसे में उच्च जोखिम वाले समूहों से रक्त या उसके घटक प्राप्त करना सुरक्षित रक्त आपूर्ति की नीति के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

वार्षिक रिपोर्ट का भी दिया गया हवाला

सरकार ने अपने हलफनामे में स्वास्थ्य मंत्रालय की वर्ष 2020-21 की वार्षिक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, समलैंगिक पुरुषों और महिला सेक्स वर्कर्स में एचआईवी के साथ-साथ हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों की दर भी अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की गई है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस तरह के प्रतिबंध केवल भारत में ही नहीं हैं, बल्कि कई विकसित और यूरोपीय देशों में भी यौन रूप से सक्रिय समलैंगिक पुरुषों और उच्च जोखिम वाले समूहों पर रक्तदान को लेकर कड़े मानक लागू किए गए हैं।

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सार्वजनिक स्वास्थ्य को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

सरकार ने अदालत में यह भी स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए रक्त चढ़ाना कई बार जीवन बचाने का अंतिम विकल्प होता है। सरकार के अनुसार ट्रांसफ्यूजन-ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन यानी रक्त चढ़ाने से होने वाले संक्रमण का खतरा कम से कम रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुंच और जमीनी चुनौतियों को देखते हुए ऐसे एहतियाती कदम उठाना जरूरी है, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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