कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने 4 अक्टूबर 2024 को उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को पत्र लिखकर संसद में उनके कार्यालय में अनधिकृत प्रवेश का मुद्दा उठाया। खरगे ने आरोप लगाया कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) और टाटा प्रोजेक्ट्स के कर्मचारियों ने बिना उनकी अनुमति के उनके कार्यालय में प्रवेश किया। उन्होंने इसे “अत्यंत अपमानजनक” और “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया, साथ ही इसे सांसद और विपक्ष के नेता के रूप में उनके विशेषाधिकारों का उल्लंघन करार दिया।
खरगे ने कहा कि यह घटना संसद में विपक्ष की आवाज को दबाने का हिस्सा है। उन्होंने पूछा कि किसके आदेश पर यह “घुसपैठ” हुई और मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपाय किए जाएं। यदि कार्यालय में प्रवेश जरूरी हो, तो उनकी अनुमति ली जाए और उनके कार्यालय का कोई प्रतिनिधि मौजूद हो। CISF ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन सूत्रों के अनुसार, यह प्रवेश रखरखाव कार्य के लिए था, जिसमें CISF कर्मी केवल सुरक्षा के लिए अन्य एजेंसियों के साथ थे
ह विवाद तब शुरू हुआ जब मई 2024 में संसद की सुरक्षा व्यवस्था CISF को सौंप दी गई थी, जो पहले संसद सुरक्षा सेवा (PSS) के पास थी। यह बदलाव दिसंबर 2023 में लोकसभा में दो लोगों के अनधिकृत प्रवेश और रंगीन गैस छोड़ने की घटना के बाद किया गया। इसके बाद से कई विपक्षी सांसदों ने CISF के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। उदाहरण के लिए, DMK सांसद एम.एम. अब्दुल्ला ने जून 2024 में आरोप लगाया था कि CISF ने उनसे संसद में प्रवेश का उद्देश्य पूछा, जो उन्होंने “अभूतपूर्व बदतमीजी” बताया।
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