Jaipur- जयपुर में CJI का बयान, बोले- मेरे नाम का दुरुपयोग कर बनाई गईं नकली साइट्स

By Anuj Kumar | Updated: February 21, 2026 • 12:22 PM

जयपुर,। “साइबर सिक्योरिटी- अवेयरनेस, प्रोटेक्शन, एंड इंक्लूसिव एक्सेस टू जस्टिस” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने डिजिटल सुरक्षा और न्याय प्रणाली के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। इस दौरान सीजेआई ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि वह स्वयं और उनका परिवार भी साइबर अपराधियों के निशाने पर रहा है। उन्होंने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि नाइजीरिया (Nigeria) में उनके नाम पर फर्जी वेबसाइट्स बनाई गईं और उनके परिवार के सदस्यों को संदेश भेजे गए।

हर दूसरे दिन बन रही फर्जी साइट’

सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि उन्हें लगभग हर दूसरे दिन अपने नाम पर बनी नई फर्जी साइट्स (fake sites) के बारे में जानकारी मिलती है। इन वेबसाइट्स के जरिए उनकी बहनों और उनकी बेटियों जैसे युवा वकीलों को मैसेज भेजे गए । उन्होंने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ये फर्जी गतिविधियां मुख्य रूप से नाइजीरिया से संचालित हो रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल क्रांति ने जहां शासन, सेवाओं और संचार को आसान बनाया है, वहीं इसके खतरों से निपटने की तत्काल आवश्यकता भी पैदा की है। सीजेआई ने कड़े शब्दों में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई प्रावधान नहीं है और आम जनता को ऐसे फर्जी दावों से सतर्क रहना चाहिए।

साइबर सुरक्षा बने नागरिक शिक्षा का हिस्सा

उन्होंने जोर देकर कहा कि साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना नागरिक शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए। सभी संस्थानों को एक समन्वित भागीदार के रूप में मिलकर काम करना होगा, ताकि डिजिटल धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

राजस्थान में बनेगी स्पेशल साइबर कोर्ट

इसी कॉन्फ्रेंस के दौरान भजन लाल शर्मा ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए राज्य में एक स्पेशल साइबर कोर्ट बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर अपराध की चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं और इनके समाधान के लिए विशेष न्यायिक ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस विशेष अदालत से मामलों के निपटान में तेजी आएगी और जनता में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। कार्यक्रम में राजस्थान की उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी, डॉ. प्रेमचंद बैरवा और कानून मंत्री जोगाराम पटेल सहित कई राजनीतिक और कानूनी हस्तियां मौजूद रहीं। कॉन्फ्रेंस का निष्कर्ष स्पष्ट रहा कि समावेशी न्याय सुनिश्चित करने के लिए तकनीक और सतर्कता का संतुलित मेल जरूरी है। विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि केवल तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यक्तिगत डेटा और वित्तीय जानकारी की सुरक्षा के लिए सख्त नीतियों के साथ समाज के हर वर्ग को जागरूक करना भी अनिवार्य है।

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