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National- अमेरिकी टैरिफ डील पर कांग्रेस का हमला, मोदी से जवाब की मांग

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: February 21, 2026 • 11:58 PM
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नई दिल्ली,। अमेरिकी टैरिफ डील पर विपक्ष फिर मोदी सरकार पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस नेता (Rahul Gandhi) ने शनिवार को पीएम मोदी पर समझौता करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनका विश्वासघात अब उजागर हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी इस व्यापार समझौते में फिर से आत्मसमर्पण कर देने वाले हैं।

खड़गे ने पूछा – इतनी जल्दबाजी क्यों?

उधर कांग्रेस अध्यक्ष (Mallikarjun Kharge) ने कहा कि टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किए बिना मोदी सरकार ने इतनी जल्दबाजी में ट्रैप डील में शामिल होकर भारत से भारी रियायतें क्यों छीन लीं। बता दें, अमेरिका ने 2 फरवरी को भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया था। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने 20 फरवरी को बताया कि अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौता फरवरी के अंत तक फाइनल होगा।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

उधर (Supreme Court of the United States) ने राष्ट्रपति Donald Trump के ग्लोबल टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि संसद को है।

‘देश के सामने सच्चाई रखें’

इस मामले में खड़गे ने कहा कि मोदी जी को देशवासियों के सामने खड़े होकर सच्चाई बतानी चाहिए। किसने या किन कारणों ने आपको भारत के राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता करने के लिए दबाव डाला? क्या यह एप्सटीन फाइल्स थीं? क्या भारत सरकार अपनी गहरी निष्क्रियता से जागेगी? क्या 140 करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान, किसानों, मजदूरों, छोटे व्यवसायों और व्यापारियों के हितों की रक्षा करने वाला एक निष्पक्ष व्यापार समझौता पेश किया जाएगा?

जयराम रमेश और मनीष तिवारी का हमला

वहीं कांग्रेस के राज्यसभा सांसद Jairam Ramesh ने कहा कि यदि सरकार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के लिए 18 दिन और इंतजार करती, तो भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा हो सकती थी। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता वास्तव में एक परीक्षा है, जिसे प्रधानमंत्री की हताशा और आत्मसमर्पण के कारण भारत पर थोपा गया है।

कांग्रेस सांसद Manish Tewari ने कहा कि यह फैसला दुनिया की अदालतों के लिए संदेश है कि उन्हें कार्यपालिका की ज्यादती रोकनी चाहिए। अगर न्यायपालिका अपना काम नहीं करेगी, तो लोकतंत्र तानाशाही में बदल सकता है। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन, न्यायपालिका और विधायिका के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है।

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शिवसेना (यूबीटी) का भी सवाल

इस मामले में शिवसेना (यूबीटी) सांसद Priyanka Chaturvedi ने कहा कि भारत ने इस समझौते में जल्दबाजी क्यों की? भारत को अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए था। अभी भारतीय निर्यात पर 10 प्रतिशत टैरिफ है, जबकि अमेरिकी आयात पर लगभग शून्य टैरिफ — इससे डील असंतुलित नजर आती है।

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