बिहार में बालू घाटों के संचालन को लेकर राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। घाट का ठेका लेने के बाद बीच में ही काम छोड़ने वाली कंपनियों पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। राज्य के खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) ने गुरुवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि ऐसी 78 कंपनियों और उनके निदेशकों को ब्लैकलिस्ट (Black List) किया जा रहा है। इस फैसले के बाद ये कंपनियां भविष्य में बिहार में होने वाली किसी भी नई टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेंगी।
ऊंची बोली लगाकर बाद में छोड़े घाट
मंत्री ने बताया कि इस बार बालू घाटों की नीलामी में पिछले साल की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा बोली लगी थी। हालांकि कई ठेकेदारों ने बाद में घाट सरेंडर कर दिया और मुनाफा नहीं होने का हवाला दिया। सरकार का मानना है कि कुछ ठेकेदार अवैध खनन से ज्यादा लाभ कमाने की उम्मीद में थे, लेकिन विभाग की कड़ी निगरानी के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका।
जिलों में टास्क फोर्स करेगी समीक्षा
सरेंडर किए गए घाटों की स्थिति की समीक्षा अब जिलों में की जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स (District Task Force) बनाई गई है। सरकार जल्द ही इन बंद पड़े घाटों की नई दरें तय कर दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है।
71 ‘खनन योद्धाओं’ को किया गया सम्मानित
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विभाग ने अवैध खनन और ओवरलोडेड खनिज वाहनों की सूचना देकर कार्रवाई में सहयोग करने वाले 71 लोगों को “बिहारी खनन योद्धा” के रूप में सम्मानित किया। सुरक्षा कारणों से इनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। विभाग के अनुसार अवैध खनन पर नियंत्रण में इन लोगों की अहम भूमिका रही है।
खनिज वाहनों के लिए ट्रांजिट चालान अनिवार्य
सरकार ने खनिज परिवहन को नियंत्रित करने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का भी फैसला किया है। मंत्री के मुताबिक दूसरे राज्यों से आने वाले खनिज से भरे वाहनों के लिए ट्रांजिट चालान (ट्रांजिट पास) लेना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे वाहनों से 85 रुपये प्रति घन फीट के हिसाब से ट्रांजिट शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा सीमावर्ती जिलों के प्रवेश मार्गों पर CCTV निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
अन्य पढ़े: PM Modi- एलपीजी संकट पर पीएम मोदी की अपील- शांति रखें, घबराएं नहीं
अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम बालू माफिया और अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उठाया गया है। इससे अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ-साथ राज्य के राजस्व को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा।
Read More :