National- कच्चा तेल 110 डॉलर पार, फिर भी भारत में ईंधन कीमतें स्थिर

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कच्चा तेल
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नई दिल्ली । अमेरिका, ईरान और इजरायल (Iran and Israel) के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। सोमवार, 6 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गईं। ब्रेंट क्रूड 1.69 डॉलर की बढ़त के साथ 110.72 डॉलर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 112.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

वैश्विक बाजार में उथल-पुथल, पड़ोसी देशों पर असर

इस वैश्विक उछाल के कारण पाकिस्तान, श्रीलंका (Srilanka) और चीन जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। कई देशों में ईंधन संकट गहराता जा रहा है, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं।

तेल कंपनियों पर भारी दबाव, घाटा बढ़ा

पेट्रोलियम मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई तेजी के कारण भारतीय तेल विपणन कंपनियों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति में कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 104 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद, आम नागरिकों को महंगाई से बचाने के लिए कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

देश में कीमतें जस की तस

राजधानी दिल्ली में 6 अप्रैल की सुबह जारी दरों के अनुसार, साधारण पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर टिका हुआ है। वहीं, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा (Howrah) और अन्य जिलों में पेट्रोल की कीमत 105 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है।

चुनाव के बीच कीमतों पर सियासी चर्चा

बाजार विशेषज्ञों और आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण कीमतों को रोक कर रखा गया है। कई लोगों का मानना है कि चुनाव संपन्न होते ही तेल कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में बड़ी वृद्धि कर सकती हैं।

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आगे क्या—बढ़ सकते हैं दाम?

इस पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिरता प्रधानमंत्री की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव के प्रभाव से देश के नागरिकों को सुरक्षित रखा जा रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि यदि ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बना रहता है, तो सरकार के लिए मौजूदा कीमतों को नियंत्रित रखना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा और आने वाले समय में घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

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