नई दिल्ली। देशभर में टीनएजर्स ऑनलाइन ठगी और ब्लैकमेलिंग (Blackmaling) के नए जाल में फंसते जा रहे हैं। सोशल मीडिया और चैटिंग प्लेटफॉर्म (Chatting Platform) पर युवाओं की बढ़ती सक्रियता अपराधियों के लिए आसानी पैदा करती है। विशेषज्ञों के मुताबिक 13 से 19 वर्ष की उम्र के अधिकांश बच्चे रोजाना 6 से 8 घंटे इंटरनेट पर बिताते हैं, जहां वे अनजाने लोगों से दोस्ती करते हैं और धीरे-धीरे इसका दुरुपयोग शुरू हो जाता है।
कैसे फंसाते हैं अपराधी?
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो ब्लैकमेलिंग का तरीका लगभग हर मामले में समान है। अपराधी लड़कियों के फर्जी प्रोफाइल से लड़कों और लड़कों के प्रोफाइल से लड़कियों से दोस्ती करते हैं। बातचीत रोमांस तक पहुंचती है, फिर वीडियो कॉल (Video Call) या निजी चैट के जरिए बच्चों को जाल में फंसाया जाता है। जब वे मानसिक दबाव में तस्वीरें या वीडियो साझा कर बैठते हैं, तो ब्लैकमेलिंग शुरू हो जाती है। कई पीड़ित युवा अपनी व माता-पिता की गाढ़ी कमाई गंवा देते हैं। कुछ एक-दो लाख रुपये देकर छुटकारा पाते हैं, तो कई परिवार गहने तक बेच देते हैं।
साइबर क्राइम के बढ़ते आंकड़े
साइबर क्राइम पोर्टल के आँकड़े स्थिति की गंभीरता बताते हैं। 2023 में सेक्सटॉर्शन, साइबर बुलिंग और स्टॉकिंग के 1070 केस दर्ज हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 1159 हो गए। सिर्फ पिछले 10 महीनों में ही 940 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक है, क्योंकि बदनामी के डर से कई परिवार मामले दर्ज ही नहीं कराते। स्टेट साइबर क्राइम एसपी दमनवीर सिंह के अनुसार, पोर्टल पर दर्ज शिकायतें सीधे थानों को भेजी जाती हैं, जहां से जांच शुरू होती है। स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
बच्चों को दें ‘डिजिटल संस्कार’
विशेषज्ञों का कहना है कि टीनएजर्स को सबसे पहले परिवार से ‘डिजिटल संस्कार’ मिलने चाहिए। पैरेंट्स की थोड़ी-सी सजगता बच्चों को बड़े खतरे से बचा सकती है।
कैसे रखें बच्चों को सुरक्षित?
✔ अकाउंट ‘प्राइवेट’ करें
बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पब्लिक न रहें। केवल उन्हीं लोगों को जोड़ें जिन्हें वे असल में जानते हों।
✔ ‘अनफ्रेंड’ करने की हिम्मत दें
संदिग्ध संदेश या निजी जानकारी मांगने पर तुरंत अनफ्रेंड करें।
✔ धमकी से न डरें
ब्लैकमेलर वीडियो वायरल करने की धमकी देते हैं, लेकिन अधिकतर प्लेटफॉर्म न्यूडिटी तुरंत ब्लॉक कर देते हैं।
✔ संवाद बनाए रखें
घर में इन खतरों पर खुलकर बात होनी चाहिए। बच्चे को पता होना चाहिए कि किसी भी समस्या में सबसे पहले माता-पिता को बताना है।
✔ सबूत न मिटाएं
चैट, स्क्रीनशॉट और ट्रांजेक्शन डिटेल पुलिस के लिए अहम सबूत होते हैं। शिकायत cybercrime.gov.in पर घर बैठे की जा सकती है।
साइबर फ्रॉड क्या होता है?
साइबर फ्रॉड एक ऑनलाइन धोखाधड़ी है जो किसी को पैसे, संपत्ति या संवेदनशील जानकारी से ठगने के लिए कंप्यूटर और इंटरनेट का उपयोग करती है। यह कई रूपों में हो सकता है, जैसे फ़िशिंग, पहचान की चोरी, रैंसमवेयर हमले, और दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर या लिंक के माध्यम से वित्तीय डेटा चुराना।
ऑनलाइन फ्रॉड कितने प्रकार के होते हैं?
साइबर सिक्योरिटी में ऑनलाइन धोखाधड़ी क्या है? साइबर सिक्योरिटी में ऑनलाइन धोखाधड़ी में ऑनलाइन धोखाधड़ी, स्पैम, पहचान की चोरी, आपके अकाउंट से धोखाधड़ी, पहचान स्पूफिंग, स्कैम पॉप-अप अलर्ट, चेन लेटर स्कैम आदि शामिल हैं.
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