LPG Gas Crisis- गैस संकट गहराया, मंदिरों में प्रसाद रुका, शैक्षणिक संस्थानों में भोजन घटा

By Anuj Kumar | Updated: March 14, 2026 • 11:53 AM

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की घरेलू रसोई और व्यापारिक गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से देश के कई हिस्सों में एलपीजी की उपलब्धता कम हो गई है। इसका असर होटल-रेस्तरां (Hotels and Restaurants) शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक स्थलों तक पहुंच गया है, जहां ईंधन बचाने के लिए कई तरह के अस्थायी कदम उठाए जा रहे हैं।

रेस्तरां और संस्थानों के मेन्यू में बदलाव

गैस की कमी के चलते कई शहरों में रेस्तरां संचालकों ने अपने मेन्यू में बदलाव करना शुरू कर दिया है। Kolkata के कुछ रेस्तरां ने ज्यादा गैस खपत वाले व्यंजन अस्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है। वहीं (National Law Institute University) और Indian Institute of Science Education and Research Bhopal जैसे शैक्षणिक संस्थानों के मेस में स्नैक्स कम कर दिए गए हैं और कई जगह वैकल्पिक ईंधन का उपयोग किया जा रहा है।

कई राज्यों में होटल कारोबार प्रभावित

स्थिति का असर विभिन्न राज्यों के होटल उद्योग पर भी पड़ा है। Gujarat के कुछ होटलों में भोजन की मात्रा कम कर दी गई है, जबकि Kerala और Karnataka में कई भोजनालयों ने अस्थायी रूप से संचालन सीमित कर दिया है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी ऊर्जा की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही हैं।

कालाबाजारी और कीमतों में बढ़ोतरी

एलपीजी की कमी का असर बाजार में भी दिखने लगा है। कई जगहों पर सिलेंडरों की कीमतों में तेजी आई है और कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं। Tamil Nadu के कुछ इलाकों में घरेलू गैस सिलेंडर ऊंचे दामों पर बिकने की खबरें मिली हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है।

धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर असर

गैस की किल्लत का असर धार्मिक स्थलों और सामुदायिक कार्यक्रमों पर भी पड़ रहा है। Secunderabad के एक प्रसिद्ध Sri Ganesh Temple में ईंधन की कमी के कारण अन्नदान और प्रसाद वितरण को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। इससे स्थानीय श्रद्धालुओं में भी चिंता का माहौल है।

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वैकल्पिक साधनों की बढ़ती मांग

स्थिति से निपटने के लिए कई जगहों पर वैकल्पिक ईंधन और उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है। Kanpur जैसे शहरों में बिजली से चलने वाले इंडक्शन कुकटॉप और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो इसका असर लंबे समय तक व्यापार और दैनिक जीवन पर पड़ सकता है।

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