పట్టాలు తప్పిన రైలు పట్టాలు తప్పిన చెన్నై ఎక్స్ ప్రెస్ రైలు నేటి నుంచి భారత్ ట్యాక్సీ సేవలు రికార్డు స్థాయికి చేరిన భారత్-చైనా ట్రేడ్ క్రీడా సంఘాల పాలనపై సుప్రీం కోర్టు కీలక వ్యాఖ్యలు ఉచిత పథకాలపై ఆర్థిక సర్వే హెచ్చరిక ముగిసిన అజిత్ పవార్ అంత్యక్రియలు ప్రపంచ దేశాలకు భారత్ షాక్ నేటి నుంచి పార్లమెంట్ బడ్జెట్ సమావేశాలు మహారాష్ట్ర డిప్యూటీ సీఎం అజిత్ పవార్ దుర్మరణం పట్టాలు తప్పిన రైలు పట్టాలు తప్పిన చెన్నై ఎక్స్ ప్రెస్ రైలు నేటి నుంచి భారత్ ట్యాక్సీ సేవలు రికార్డు స్థాయికి చేరిన భారత్-చైనా ట్రేడ్ క్రీడా సంఘాల పాలనపై సుప్రీం కోర్టు కీలక వ్యాఖ్యలు ఉచిత పథకాలపై ఆర్థిక సర్వే హెచ్చరిక ముగిసిన అజిత్ పవార్ అంత్యక్రియలు ప్రపంచ దేశాలకు భారత్ షాక్ నేటి నుంచి పార్లమెంట్ బడ్జెట్ సమావేశాలు మహారాష్ట్ర డిప్యూటీ సీఎం అజిత్ పవార్ దుర్మరణం

Supreme Court: दहेज के बढ़ते ट्रेंड से, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Author Icon By digital@vaartha.com
Updated: April 24, 2025 • 11:35 AM
వాట్సాప్‌లో ఫాలో అవండి

सुप्रीम कोर्ट के दो जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा को ऐसा लगता है कि महिला की ननद, पति और ससुर के खिलाफ सामान्य आरोप थे। कोर्ट ने इस मामले में आईपीसी की धारा 498ए, दहेज निषेध अधिनियम 1961 की धारा 4 लगाई है।

दहेज के बढ़ते चलन के कारण सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज पीड़िता द्वारा पति के रिश्तेदारों पर आरोप लगातार बढ़ रहा है और उसने एक महिला के सास-ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला खारिज कर दिया। हालांकि कोर्ट ने इस मामले में पाया है कि अपीलकर्ताओं द्वारा किसी भी प्रकार की फिजिकल यातना दिए जाने का आरोप गायब है।

आरोप सिर्फ उच्च पद और ताना मारने का लगाया

स्टेटमेंट में कहा गया है कि आरोप सिर्फ ताना मारने और वे उच्च पद पर हैं। इसमें उनका राजनीतिक प्रभाव है और मंत्रियों से संबंध भी है। इसलिए उन्होंने आरोपी पति से लेकर आरोपी पति के माता-पिता को वास्तविक शिकायतकर्ता पर अतिरिक्त दहेज लाने के लिए दबाव बनाने के लिए उकसाया गया।

दहेज निषेध अधिनियम 1961 की धारा 4 के तहत

आदेश में कहा गया है कि दहेज पीड़िता द्वारा पति के रिश्तेदारों को दोषी ठहराने की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए, कोर्ट ने आईपीसी की धारा 498A और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 4 के तहत अपराध के लिए पति के रिश्तेदारों को शामिल करने की प्रथा की निंदा जताई है। इस निर्णयों का हवाला देते हुए बेंच के जस्टिस ने कहा कि उसने दहेज संबंधी मामलों में पति के रिश्तेदारों को शामिल करने की प्रथा को दोहराया है।

2014 में हुई थी शादी

बता दें कि इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता और उसके पति का विवाह 2014 में गुंटूर, आंध्र प्रदेश में हुआ था।

शादी के 5 महीने बाद ही महिला अपने पति को छोड़कर अपने माता-पिता के साथ रहने लगी थी।

वह दोबारा से अपने ससुराल चली गई लेकिन फिर अपने माता-पिता के पास वापल आ गई।

पति ने पत्नी के घर पर नोटिस भेजा

पत्नी के वापस चले जाने के बाद पति ने उसे कानूनी तौर पर नोटिस भेजा और उसके बाद 2015 में वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए याचिका दायर की।

इस कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान, उन्होंने 2016 में पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। हालांकि इस मामले का समझौता हो गया और पति ने मामला वापस ले लिया है। इसके बाद वह अपने पति या ससुराल के सदस्यों को सूचित किए बिना ही अमेरिका चली गई। इसकी वजह से विवाद जारी रहा। पति ने 21 जून, 2016 को विवाह के लिए याचिका दायर की और जवाबी कार्रवाई में उसने वर्तमान अपीलकर्ताओं सहित 6 आरोपियों के खिलाफ फिर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

red:mor: Supreme Court: ताजमहल की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त,

#Hindi News Breaking News In Hindi Headlines in Hindi Hindi News Headlines Hindi News Live Hindi Samachar hindi Vaartha Latest news in Hindi News in Hindi today hindi vaartha news today news ताज़ा ख़बर ब्रेकिंग न्यूज़ हिन्दी समाचार

గమనిక: ఈ వెబ్ సైట్ లో ప్రచురించబడిన వార్తలు పాఠకుల సమాచార ప్రయోజనాల కోసం ఉద్దేశించి మాత్రమే ఇస్తున్నాం. మావంతుగా యధార్థమైన సమాచారాన్ని ఇచ్చేందుకు కృషి చేస్తాము.