National- आर्थिक साझेदारी मजबूत, भारत-यूएई ने 200 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य रखा

Read Time:  1 min
भारत-यूएई
भारत-यूएई
FONT SIZE
GET APP

नई दिल्ली,। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों ने सोमवार को एक नया मुकाम हासिल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2032 तक दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया। वित्त वर्ष 2024-25 में यह व्यापार पहले ही 100 अरब डॉलर के आंकड़े को छू चुका है, जो 2022 में हुए व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) की सफलता को दर्शाता है।

2032 तक 200 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को नई गति देने पर सहमति जताई। संयुक्त बयान में कहा गया कि अगले आठ वर्षों में व्यापार को दोगुना करने के लिए नीतिगत सहयोग और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।

एमएसएमई और वैश्विक बाजार पर फोकस

संयुक्त बयान में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए ‘भारत मार्ट’, ‘वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर’ और ‘भारत–अफ्रीका सेतु’ जैसी पहलों को शीघ्र लागू करने का आह्वान किया गया है, ताकि भारतीय उत्पाद मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरेशिया तक आसानी से पहुंच सकें।

धोलेरा परियोजना में यूएई की संभावित भागीदारी

गुजरात के धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र में यूएई की संभावित भागीदारी पर भी चर्चा हुई। इस परियोजना के तहत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, स्मार्ट सिटी, रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा बुनियादी ढांचे जैसे बड़े रणनीतिक ढांचे विकसित किए जाएंगे।

इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय सहयोग मजबूत

प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के सॉवरेन वेल्थ फंड्स को 2026 में प्रस्तावित दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में निवेश के लिए आमंत्रित किया। साथ ही, गिफ्ट सिटी (गुजरात) में डीपी वर्ल्ड और फर्स्ट अबू धाबी बैंक (एफएबी) की शाखाओं की स्थापना का स्वागत किया गया। यह कदम भारतीय निवेशकों को खाड़ी देशों और उत्तरी अफ्रीका के बाजारों से जोड़ने में मदद करेगा।

ऊर्जा सुरक्षा पर दीर्घकालिक समझौता

ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाते हुए हिंदुस्तान पेट्रोलियम और एडीएनओसी गैस के बीच 10 वर्षीय एलएनजी आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत 2028 से प्रति वर्ष 0.5 मिलियन टन गैस की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (एसएमआर) में सहयोग की संभावनाओं पर भी सहमति बनी।

अंतरिक्ष और एआई में साझेदारी

भविष्य की तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अंतरिक्ष क्षेत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया। भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर और डेटा सेंटर स्थापित करने में यूएई सहयोग करेगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में संयुक्त मिशनों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए साझा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा।

अन्य पढ़े: ग्रीनलैंड पर घमासान: ट्रम्प की धमकी के बाद NATO देशों की सैन्य लामबंदी

सीमा-पार भुगतान होगा आसान

दोनों नेताओं ने राष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्म को आपस में जोड़ने के निर्देश दिए, जिससे सीमा-पार लेनदेन अधिक सस्ता, तेज और सुरक्षित बनाया जा सके। माना जा रहा है कि यह पहल भविष्य में दोनों देशों के नागरिकों और व्यापारियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।

Read More :

Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।