विशेष अवसर पर भारतीय और विदेशी पर्यटक बिना शुल्क कर सकेंगे दीदार। 2. आगरा में ताजमहल रहेगा निशुल्क तीन दिन खुलेंगे गेट, मुफ्त में मिलेगा प्रवेश पर्यटन विभाग ने जारी की आधिकारिक जानकारी।
आगरा में शाहजहां के (Agra) तीन दिवसीय उर्स पर तीन दिन तक ताजमहल में प्रवेश शुल्क माफ रहेगा. ASI के अनुसार तय समय पर बिना टिकट एंट्री होगी, टिकट काउंटर बंद रहेंगे. इससे पर्यटकों को राहत और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश के आगरा से पर्यटकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. मुगल बादशाह शाहजहां के तीन दिवसीय वार्षिक उर्स के अवसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने ताजमहल में प्रवेश शुल्क माफ करने का बड़ा फैसला लिया है. आगामी 15, 16 और 17 जनवरी 2026 को पर्यटक बिना किसी टिकट के दुनिया के इस सातवें अजूबे का दीदार कर सकेंगे।
ASI द्वारा जारी आदेश के अनुसार, उर्स के तीनों दिन फ्री एंट्री का समय अलग-अलग तय किया गया है. चलिए जानते हैं क्या है टाइमिंग।
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* 15 जनवरी (गुरुवार): दोपहर 2:00 बजे से सूर्यास्त तक. * 16 जनवरी (शुक्रवार): दोपहर 2:00 बजे से सूर्यास्त तक. * 17 जनवरी (शनिवार): सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक (पूरा दिन प्रवेश मुफ्त)।
टिकट काउंटर रहेंगे बंद
अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिता एस. कुमार द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक, इन तीन दिनों के निर्धारित समय के दौरान ताजमहल के सभी बुकिंग काउंटर बंद रहेंगे. पर्यटकों को परिसर में प्रवेश के लिए किसी भी प्रकार के ऑनलाइन या ऑफलाइन टिकट की आवश्यकता नहीं होगी. सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए एएसआई और स्थानीय पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और मर्यादा बनी रहे।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
शाहजहां के उर्स के मौके पर हर साल देश-दुनिया से लाखों जायरीन और पर्यटक आगरा पहुंचते हैं. सतरंगी चादर: उर्स के दौरान ताजमहल में पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं और मुख्य मकबरे पर सतरंगी चादर चढ़ाई जाती है. पर्यटकों को लाभ: शुल्क माफी से न केवल आम पर्यटकों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि इससे आगरा के स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को भी भारी उछाल मिलने की उम्मीद है।
ताजमहल की पूरी कहानी क्या है?
ताजमहल का निर्माण शाहजहाँ ने 1631 में अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में करवाया था, जिनकी मृत्यु उसी वर्ष 17 जून को उनकी 14वीं संतान गौहरा बेगम को जन्म देते समय हो गई थी। निर्माण कार्य 1632 में शुरू हुआ और मकबरा 1648 में बनकर तैयार हुआ, जबकि आसपास की इमारतें और बगीचे पाँच साल बाद बनकर तैयार हुए।
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