दिल्ली में 40 साल बाद डबल डेकर बसें लौट आई हैं. ये इलेक्ट्रिक ओपन-टॉप बसें विजय चौक से इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा जैसे ऐतिहासिक स्थलों तक प्रीमियम हेरिटेज टूर कराएंगी. सीएम रेखा गुप्ता इसे हरी झंडी दिखाएंगी, जिससे पर्यटन और स्वच्छ गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा. इनमें लाइव गाइड और जीरो एमिशन की खासियत है।
दिल्ली में चार दशक बाद डबल डेकर बसों (double decker buses) की वापसी हो रही है. ये बसें विजय चौक से नेशनल वॉर मेमोरियल, भारत मंडपम, न्यू पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स, दिल्ली हाट, इंडिया गेट और सेंट्रल विस्टा तक चलेगी. इन बसों को प्रीमियम हेरिटेज टूरिस्ट सर्विस के तहत दिल्ली की सड़कों पर चलाया जाएगा. ये डबल डेकर बसें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होंगी. सीएम रेखा गुप्ता ने डबल डेकर ओपन-टॉप बसों को विजय चौक से हरी झंडी दिखाएंगी, जिसका मकसद टूरिज्म और क्लीन मोबिलिटी को बढ़ावा देना है।
लगभग 40 साल बाद, डबल-डेकर बसें राजधानी की सड़कों पर वापस आ गई हैं. ये बसें ओपन-टॉप टूरिस्ट कोच के रूप में होंगी. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता विजय (Gupta Vijay) चौक से इस सर्विस को हरी झंडी दिखाएंगी, जो सस्टेनेबल टूरिज्म को एक नया बढ़ावा देगा. इन बसों को रोजाना के ट्रांसपोर्ट के बजाय एक प्रीमियम हेरिटेज अनुभव के तौर पर डिजाइन किया गया है।
क्या है इन बसों की खासियत?
ये नई डबल-डेकर बसें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक हैं, जिसका मतलब है कि शहर की बिजी सड़कों पर जीरो एमिशन और कम शोर होगा. हर बस में लगभग 63 यात्री बैठ सकते हैं. ओपन-टॉप अपर डेक से सेंट्रल विस्टा और आस-पास की जगहों का साफ नजारा दिखेगा, जो यात्रियों को एक अलग अनुभव कराएगा. हर स्टॉप पर एक लाइव टूर गाइड आसान और दिलचस्प कहानियां भी सुनाएगा. बसों में दिल्ली की मशहूर जगहों के शानदार ग्राफिक्स भी लगाए गए हैं।
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कितने बजे से चलेंगी बसें, क्या होगा किराया?
बस सुबह और शाम के समय चलेगी. शाम में बसें करीब 6 बजे के आस-पास संचालित की जाएगी. बड़ों के लिए टिकट 500 रुपए प्रति व्यक्ति और 6 से 12 साल के बच्चों के लिए 300 रुपए किराया निर्धारित किया गया है. बसे के किराए में गाइडेड टूर शामिल है. टिकट ऐप और काउंटर दोनों जहगों से मिलने की उम्मीद है।
4 दशक पहले चलती थी ये बसें
दिल्ली में आखिरी बार डबल-डेकर बसें 1960 और 1970 के दशक में दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की सुविधा सर्विस के तहत चली थीं. लाल और हरे रंग की बसें चांदनी चौक से कनॉट प्लेस और ITO तक चलती थीं. बढ़ते मेंटेनेंस खर्च, सेफ्टी की दिक्कतों और तंग सड़कों की वजह से 1980 के दशक के आखिर तक बसों को हटा दिया गया था. ये बसें रोजाना के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि एक चुनी हुई टूरिस्ट सर्विस है।
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