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Delhi- वांगचुक की हिरासत पर याचिका की सुनवाई टली, फैसला अब 29 जनवरी को

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: January 14, 2026 • 2:10 PM
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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया। न्यायालय ने वांगचुक (Wangchuk) की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई 29 जनवरी 2026 तक के लिए टाल दी है। याचिका में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत लगाए गए आरोपों को चुनौती दी गई है।

याचिका में हिरासत को अवैध बताया

गीतांजलि ने दलील दी कि उनके पति की हिरासत पूरी तरह अवैध और मनमानी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने हिरासत का आदेश जारी करते समय केवल अप्रासंगिक सामग्री को आधार बनाया और उचित विवेक का इस्तेमाल नहीं किया।

सोनम वांगचुक का भाषण शांतिपूर्ण था

याचिका में तर्क दिया गया कि वांगचुक द्वारा लेह में दिए गए भाषणों का उद्देश्य हिंसा भड़काना नहीं बल्कि लोगों को शांत करना था। प्रशासन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है, ताकि उन्हें अपराधी के रूप में चित्रित किया जा सके।

पृष्ठभूमि: हिंसा और हिरासत

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लद्दाख (Ladakh) को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए प्रदर्शनों के बाद की गई थी। हिंसा में चार लोग मारे गए और लगभग 90 घायल हुए।

सरकार का पक्ष

सरकार और लेह के जिलाधिकारी का दावा है कि वांगचुक ने हिंसा भड़काने में मुख्य भूमिका निभाई और उनकी गतिविधियां राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक थीं।

वकील का कहना: उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई

गीतांजलि ने अदालत में कहा कि वांगचुक को हिरासत का पूरा आधार नहीं बताया गया और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि 24 सितंबर को हुई हिंसा के लिए उनके पति के बयानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

जिलाधिकारी ने आरोपों का खंडन किया

जिलाधिकारी ने हलफनामे में खंडन किया कि वांगचुक के साथ कोई अनुचित व्यवहार नहीं किया गया।

अगली सुनवाई पर सबकी निगाहें

अब सभी की निगाहें 29 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत इस संवेदनशील मामले पर विस्तार से विचार करेगी।

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