PM Modi- ऐतिहासिक समझौता, दशकों से लंबित मुद्दे का समाधान-पीएम मोदी

By Anuj Kumar | Updated: February 6, 2026 • 2:02 PM

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार (India Government) नगालैंड सरकार और ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) के प्रतिनिधियों के बीच हुए समझौते की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह समझौता लोगों के लिए अवसर और समृद्धि के नए रास्ते खोलेगा।

पीएम मोदी ने बताया ऐतिहासिक समझौता

पीएम मोदी ने शुक्रवार को एक्स पर लिखा- यह सच में एक ऐतिहासिक समझौता है, जो खासकर पूर्वी नागालैंड के विकास की राह को बेहतर बनाएगा। मुझे यकीन है कि यह लोगों के लिए अवसर और समृद्धि के नए रास्ते खोलेगा। यह नॉर्थईस्ट में शांति, प्रगति और सबके विकास के लिए हमारी पक्की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

अमित शाह बोले- दशकों से लंबित मुद्दों का समाधान

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझौते की जानकारी दी और कहा कि भारत सरकार, नागालैंड सरकार और ईएनपीओ के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिससे पूर्वी नागालैंड के दशकों से चले आ रहे लंबित मुद्दे हल हो गए। उन्होंने बताया कि यह सभी विवादित मुद्दों को सुलझाकर शांतिपूर्ण और समृद्ध पूर्वोत्तर के लिए पीएम मोदी के विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ईएनपीओ क्या है, किन जिलों को मिलेगा लाभ

बता दें ईएनपीओ नगालैंड के छह पूर्वी जिलों के आठ मान्यता प्राप्त नगा जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाला शीर्ष संगठन है। गृह मंत्री अमित शाह और नगालैंड के सीएम नेफिउ रियो की मौजूदगी में गुरुवार को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी का गठन

इस समझौते से नगालैंड के छह जिलों के लिए फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (एफएनटीए) का गठन किया जाएगा। एफएनटीए को 46 विषयों के संबंध में शक्तियों का हस्तांतरण किया जाएगा। यह समझौता एफएनटीए के लिए एक मिनी-सचिवालय के गठन का प्रावधान करता है, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव की ओर से किया जाएगा।

विकास व्यय का होगा न्यायसंगत बंटवारा

साथ ही पूर्वी नगालैंड क्षेत्र के लिए विकास व्यय का आबादी और क्षेत्रफल के अनुपात में बंटवारा भी किया जाएगा। हालांकि, यह समझौता भारत के संविधान के प्रावधानों को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करता है।

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संवाद से समाधान पर केंद्र का जोर

गृह मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता पूर्वोत्तर के लोगों की वास्तविक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए विवादास्पद मुद्दों को संवाद के जरिए हल करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांत को भी सिद्ध करता है कि समाधान केवल आपसी सम्मान व संवाद पर आधारित बातचीत से ही प्राप्त किए जा सकते हैं, न कि हिंसा और सशस्त्र संघर्ष के जरिए से।

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