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Holi 2026 : 4 मार्च को रंगों का पर्व होली, जानें शुभ मुहूर्त और होलिका दहन की विधि

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: February 28, 2026 • 10:37 AM
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रंगों और उल्लास का पर्व होली (Holi) इस साल 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह त्योहार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और प्रेम, भाईचारे व सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण (Bhagwan Sri Krishna) ने गोकुलवासियों के साथ रंगों की होली खेलकर इस परंपरा की शुरुआत की थी। इसी कारण आज भी बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक एक-दूसरे को रंग लगाकर इस दिन को उत्साह के साथ मनाते हैं।

होली 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

इन शुभ मुहूर्तों में रंग खेलना विशेष फलदायी माना गया है।

चंद्र ग्रहण का प्रभाव: कब खेलें रंग?

3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं और सूतक भी प्रभावी रहता है। इसलिए रंगों की होली 4 मार्च को खेलना ही शुभ माना गया है।

क्यों मनाई जाती है होली?

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण अपनी माता माता यशोदा से पूछा करते थे कि उनका रंग सांवला और राधा का रंग गोरा क्यों है। तब माता यशोदा ने हंसते हुए कृष्ण से कहा कि वे राधा को अपने रंग में रंग दें। कृष्ण ने ऐसा ही किया और तभी से रंगों की होली की परंपरा शुरू मानी जाती है। यह कथा प्रेम और अपनत्व का संदेश देती है।

होलिका दहन : बुराई पर अच्छाई की जीत

होली से एक दिन पहले पूर्णिमा की रात को होलिका दहन किया जाता है। यह परंपरा पौराणिक कथा से जुड़ी है। असुरराज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका की सहायता ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था।

लेकिन अधर्म का साथ देने के कारण होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गई, जबकि भक्त प्रह्लाद भगवान की कृपा से सुरक्षित बच गए। यह घटना सत्य और भक्ति की शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

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होलिका दहन की सरल पूजा विधि

देश के कई हिस्सों में होलिका की अग्नि में पकवान या पकोड़े अर्पित करने की भी परंपरा है।

होली का यह पावन पर्व हमें प्रेम, एकता और सत्य की राह पर चलने का संदेश देता है।

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