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News Hindi : राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो वह अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता हैः योगी आदित्यनाथ

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: December 4, 2025 • 3:42 PM
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जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते है

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 के शुभारंभ अवसर पर स्वदेश, स्वधर्म व राष्ट्रीय स्वाभिमान का जिक्र किया और कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं या कोई राष्ट्रीय चुनौती होती है तो महापुरुषों के चित्र, उनके शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैं। महाराणा प्रताप (Maharana Pratap), छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई समेत सीमाओं की रक्षा करते हुए बलिदान देने वाले भारत मां के बहादुर जवान देश के लिए प्रेरणा हैं।

राष्ट्र की पहचान वहां की संस्कृति, परंपराएं और महापुरुष होते हैं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्र की पहचान वहां की संस्कृति, परंपराएं और महापुरुष होते हैं, यह एक-दूसरे से जुड़े हैं। राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो राष्ट्र अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता है। संस्कृति उन राष्ट्रीय मूल्यों से बनती है, जिन्हें समय-समय पर अलग-अलग युगांतकारी घटनाओं ने संबल और शक्ति दी। जिन्हें विभिन्न पर्वों के माध्यम से पूरा भारत बिना भेदभाव के आत्मसात करता है। पर्व में मतभेदों को समाप्त करके हम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते है।

दिवंगत सदस्यों को दी गई श्रद्धांजलि

महंत दिग्विजयनाथ महाराज द्वारा 1932 में गोरखपुर में स्थपित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाले स्मृतिशेष प्रो. यूपी सिंह व अन्य दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि दी।

यह आत्ममंथन का अवसर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद अगले छह वर्ष के अंदर होने वाले शताब्दी महोत्सव के कार्यक्रम के साथ बढ़ रहा है। ऐसे में शिक्षा परिषद व संस्थाओं के सामने 100 वर्षों की इस यात्रा के आत्ममंथन का अवसर है। यह समारोह इस पर आत्मावलोकन का अवसर प्रस्तुत कर रहा है कि छात्र के सर्वांगीण विकास, समाज व राष्ट्र के प्रति हमने अपनी भूमिका का निर्वहन किस रूप में किया है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापकों ने जो विराट लक्ष्य रखा है, वह समाज व राष्ट्र के प्रति हमारी सेवाएं-कर्तव्य के समय-समय पर मूल्यांकन का भी है। हमारे संस्थापकों ने छात्र-छात्राओं के सामने महाराणा प्रताप के रूप में आदर्श रखा।

शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि आदि पर जोर दे रहा परिषद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण, अपनी संकल्पना और भावना को बढ़ाने के लिए संस्थापकों ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। परिषद शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, महाराणा प्रताप पॉलीटेक्निक आदि के जरिए तकनीक पर जोर दे रहा है तो वहीं महिलाओं की शिक्षा, अन्नदाता किसानों के प्रशिक्षण के लिए महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र या अन्न संस्थाएं दूरदराज के क्षेत्रों में नए प्रयास को बढ़ाने के साथ ही कार्य कर रही हैं।

योगी जी कितने पढ़े-लिखे हैं?

Yogi Adityanath ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में स्नातक (B.Sc.) किया। पढ़ाई के दौरान ही वे सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े। स्नातक के बाद वे गोरखनाथ मठ आए, जहाँ दीक्षा लेकर संन्यासी जीवन की शुरुआत की और आगे चलकर राजनीति में सक्रिय हुए।

योगी का पुराना नाम क्या था?

Yogi Adityanath का जन्म नाम अजय सिंह बिष्ट था। गोरखनाथ मठ में दीक्षा लेने के बाद उनका नाम बदलकर योगी आदित्यनाथ रखा गया। संन्यासी परंपरा के तहत नया नाम आध्यात्मिक मार्ग और जिम्मेदारी का प्रतीक होता है, जिसे वे आज भी पूरी निष्ठा से निभाते हैं।

योगी किसकी पूजा करते हैं?

Yogi Adityanath गोरखनाथ संप्रदाय के अनुयायी हैं और गोरखनाथ, गुरु गोरक्षनाथ तथा अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। वे नाथ परंपरा के सिद्धांतों के अनुसार योग, ध्यान, पूजा और दैनिक अनुष्ठान का पालन करते हैं। उनका पूजा-पाठ पूर्णतः वैदिक व पारंपरिक शैली में होता है।

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