Robot dog controversy : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में दुनिया भर के देश तकनीकी श्रेष्ठता हासिल करने की दौड़ में हैं। अमेरिका, चीन और यूरोप एआई क्षेत्र में अरबों डॉलर निवेश कर रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण समय में दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में घटी एक घटना ने भारत की तकनीकी साख पर बहस छेड़ दी है।
ग्रेटर नोएडा की गालगोटियास यूनिवर्सिटी ने “Orion” नाम से एक रोबोटिक डॉग प्रदर्शित किया। इसे विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित बताया गया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय टेक समुदाय ने खुलासा किया कि यह रोबोट वास्तव में चीन की Unitree कंपनी का Go2 मॉडल है, जिसे कोई भी ऑनलाइन खरीद सकता है।
सच्चाई सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू हो गई। लोगों ने सवाल उठाया कि खरीदे गए उत्पाद को स्वदेशी नवाचार के रूप में क्यों प्रस्तुत किया गया। विवाद बढ़ने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने इसे विकसित करने का दावा नहीं किया था, बल्कि छात्रों के प्रशिक्षण के लिए खरीदा था। फिर भी शुरुआत में पारदर्शिता न बरतने पर सवाल बने हुए हैं।
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भारतीय इंजीनियर विश्वभर में अपनी प्रतिभा साबित कर रहे हैं और देश एआई (Robot dog controversy ) महाशक्ति बनने का लक्ष्य रखता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं। वास्तविक नवाचार केवल असेंबलिंग नहीं बल्कि बौद्धिक संपदा का सृजन होता है। मौलिकता के बिना वैश्विक मंच पर भरोसा कमज़ोर पड़ सकता है।
यह घटना एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। यदि भारत को एआई क्षेत्र में अग्रणी बनना है तो केवल प्रस्तुति और प्रचार से काम नहीं चलेगा; वास्तविक अनुसंधान और स्वदेशी नवाचार पर ध्यान देना होगा। शॉर्टकट सुर्खियाँ दिला सकते हैं, लेकिन इतिहास में जगह ईमानदार और मौलिक प्रयासों से ही मिलती है।
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