National- भारत को मिला पहला ‘सिटी ऑफ लिटरेचर’, कोझिकोड का चयन

By Anuj Kumar | Updated: February 11, 2026 • 10:41 AM

नई दिल्ली । केरल राज्य का कोझिकोड शहर (Kozhikode city) यूनेस्को द्वारा भारत के पहले ‘साहित्य के शहर’ के रूप में चयनित किया गया है। इस उपलब्धि ने न सिर्फ कोझिकोड को नई पहचान दी है, बल्कि पूरे देश की साहित्यिक साख को अंतरराष्ट्रीय मंच (international forum) पर और अधिक प्रतिष्ठा दिलाई है।

यूनेस्को के क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क में ऐतिहासिक एंट्री

यह सम्मान दुनिया में केवल कुछ ही शहरों को मिलता है, जहां साहित्यिक योगदान, पुस्तक संस्कृति और पुस्तकालयों का मजबूत नेटवर्क समाज की पहचान का हिस्सा हो। यूनेस्को (Unesco) के ‘क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क’ में शामिल होने के साथ ही कोझिकोड अब एडिनबर्ग, प्राग और डब्लिन जैसे वैश्विक साहित्यिक नगरों की श्रेणी में आ गया है।

किताबों से जुड़ी शहर की धड़कनें

यह सम्मान किसी एक दिन या साल के काम का परिणाम नहीं है, बल्कि उस परंपरा का फल है जिसमें शहर की धड़कनें किताबों की खुशबू से जुड़ी हैं। कोझिकोड में मौजूद 500 से ज्यादा पुस्तकालय इस बात का प्रमाण हैं कि यहां की जनता केवल पढ़ने तक सीमित नहीं, बल्कि किताबों को अपने सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा मानती है।

साहित्य उत्सवों से बनता है जीवंत माहौल

शहर के वार्षिक साहित्य उत्सवों में देश-विदेश के लेखक और विचारक भाग लेते हैं, जो कोझिकोड को एक जीवंत साहित्यिक केंद्र बनाते हैं।

व्यापारिक इतिहास से सांस्कृतिक पहचान तक

एक समय कालीकट के नाम से प्रसिद्ध कोझिकोड अपने मसालों और व्यापार के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इसकी सांस्कृतिक पहचान इससे कहीं आगे बढ़ चुकी है। शहर की गलियों, चाय के खोखों और सार्वजनिक स्थलों पर साहित्य पर होने वाली चर्चाएं आज भी आम दृश्य हैं।

यूनेस्को ने पहचानी ‘रीडिंग कल्चर’

यूनेस्को ने कोझिकोड की इसी मजबूत ‘रीडिंग कल्चर’ को पहचानते हुए इसे भारत का पहला ‘सिटी ऑफ लिटरेचर’ घोषित किया है। यहां के पुस्तकालय न केवल ज्ञान के स्रोत हैं, बल्कि सामुदायिक जुड़ाव के केंद्र भी बन चुके हैं।

महान साहित्यकारों की जन्मभूमि

कोझिकोड कई महान साहित्यकारों की जन्मभूमि भी रहा है। एस.के. पोट्टेक्कट्ट और एम.टी. वासुदेवन नायर जैसी हस्तियों ने मलयाली साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

मिट्ठई थेरुवु और साहित्यिक स्मृतियां

शहर की प्रसिद्ध ‘मिट्ठई थेरुवु’ पर स्थित पोट्टेक्कट्ट की प्रतिमा आज भी स्थानीय लोगों और यात्रियों को कोझिकोड की गहरी साहित्यिक जड़ों की याद दिलाती है।

केरल लिटरेचर फेस्टिवल और प्रकाशन उद्योग

यहां आयोजित होने वाला ‘केरल लिटरेचर फेस्टिवल’ एशिया के प्रमुख साहित्यिक आयोजनों में गिना जाता है। साथ ही कोझिकोड मलयाली प्रकाशन उद्योग का बड़ा केंद्र है, जहां डिजिटल दौर के बावजूद भौतिक किताबों की बिक्री लगातार बढ़ रही है।

Read More :

#Breaking News in Hindi #Hindi News #international forum News #Kerala news #Kozhikode city News #Latest news #Reading Culture News #Unesco News