Latest Hindi News : भारत का रक्षा कवच हो रहा और मजबूत

By Anuj Kumar | Updated: November 9, 2025 • 11:22 AM

नई दिल्ली,। भारत अपने आप को बेहद ताकतवर बनाने के लिए रातदिन काम कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद भारत ने अपने डिफेंस सिस्टम को अपग्रेड और मजबूत करने में जुटा है। दुनिया के तमाम देश अब ऐसे वेपन सिस्टम डेवलप करने लगे हैं, जिससे घर बैठे हजारों किलोमीटर दूर स्थित टार्गेट को तबाह किया जा सके। इसके तहत लंबी दूरी की मिसाइल्स डेवलप की जा रही हैं। इसे आमतौर पर इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) कहा जाता है। भारत भी इसमें पीछे नहीं है।

अग्नि सीरीज़ बनी भारत की ताकत की रीढ़

अग्नि सीरीज के तहत कई मिसाइलें विकसित की गई हैं, जिनका रेंज 2000 किलोमीटर से 5500 किलोमीटर तक है। अभी तक अग्नि-5 तक मिसाइल बनाई गई हैं। अग्नि-5 को आईसीबीएम का दर्जा हासिल है। अब इसी सीरीज में एक और महाबली अग्नि-6 तैयार किया जा रहा है।

रक्षा मंत्री ने किया अग्नि-6 का खुलासा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के फ्यूचर डिफेंस प्लान (Future Defence Plan) को डिकोड किया है। उन्होंने अग्नि-6 को डेवलप करने की बात कही है। अग्नि-6 की जद में चीन, पाकिस्तान के साथ तुर्की जैसे देश भी होंगे। एक्सपर्ट का तो यह भी मानना है कि अग्नि-6 की रेंज में अमेरिका भी शामिल हो सकता है।

अग्नि-6 की मारक क्षमता 10,000 से 12,000 किमी तक

एक इंटरव्यू में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्नि-6 मिसाइल को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने बताया कि इस मिसाइल पर काम चल रहा है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि अग्नि-6 की मारक क्षमता 10,000 से 12,000 किलोमीटर तक हो सकती है। यदि ऐसा है तो इसकी जद में पूरा चीन, पाकिस्तान और तुर्की जैसे देश आ जाएंगे।

तुर्की पर भारत की नाराजगी के संकेत

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने खुले तौर पर पाकिस्तान का साथ दिया था। यह वही तुर्की है, जिसकी मदद करने में भारत ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। कुछ साल पहले जब तुर्की में विनाशकारी भूकंप आया था, तब भारत ने ऑपरेशन दोस्त चलाकर मानवीय सहायता भेजी थी। लेकिन अब अग्नि-6 के डेवलप होने के बाद पाकिस्तान के दोनों “जिगरी यार” इसकी जद में आ जाएंगे।

रक्षा सशक्तीकरण और स्वदेशी उत्पादन पर फोकस

केंद्र सरकार ने रक्षा सशक्तीकरण और स्वदेशी उत्पादन को लेकर कई अहम संकेत दिए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि रूस की तरफ से यदि इसे उपलब्ध कराया गया तो भारत भविष्य में इसकी और यूनिट्स खरीद सकता है।

सुखोई-57 और न्यूक्लियर सबमरीन पर भी काम जारी

इस बीच, रूसी उन्नत लड़ाकू विमान सुखोई-57 के भारत में उत्पादन पर बातचीत अभी भी चल रही है। यह पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है। दूसरी तरफ, डीआरडीओ भी एडवांस्ड वेपन सिस्टम को तेजी से डेवलप करने में जुटा है।
अग्नि-6 बैलिस्टिक मिसाइल के साथ ही न्यूक्लियर कैपेबल सैन्य पनडुब्बी के विकास और थिएटर स्तरीय कमान स्ट्रक्चर पर काम जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, न्यूक्लियर सबमरीन से भारत की मैरीटाइम सिक्योरिटी को अत्यधिक मजबूती मिलेगी।

ड्रोन तकनीक में भारत की बड़ी छलांग

ड्रोन तकनीक पर भारत ने पिछले कुछ वर्षों में भारी निवेश और विकास देखा है। रक्षा मंत्री ने बताया कि स्वदेशी ड्रोन प्लेटफ़ॉर्म पर तेज काम चल रहा है जो निगरानी और स्ट्राइक दोनों भूमिकाओं को निभा सकेंगे। ये आधुनिक यूएवी सीमापार खतरों का पता लगाने और त्वरित कार्रवाई में सक्षम होंगे।

भारत में ही बनेगा फाइटर जेट इंजन

राजनाथ सिंह ने फाइटर जेट को देश में ही डेवलप करने को लेकर भी बड़ी बात कही है। उन्होंने बताया कि अगले एक साल के भीतर देश में प्रयोग में आने वाले सभी फाइटर जेट इंजनों का उत्पादन भारत में ही होगा। इसके लिए आवश्यक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को अनिवार्य शर्त बनाया जा रहा है, ताकि घरेलू उद्योग को विशेषज्ञता और विनिर्माण क्षमता दोनों में मजबूती मिले।

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