National- भारत-अमेरिका ट्रेड डील से चीन की मोनोपॉली को झटका

By Anuj Kumar | Updated: February 5, 2026 • 10:45 AM

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका (India and America) के बीच आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों में एक अभूतपूर्व तेजी देखने को मिल रही है, जिससे वैश्विक व्यापार का परिदृश्य बदलने की उम्मीद है। सोमवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के बीच हुई टेलीफोनिक वार्ता के बाद अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।

मोदी-ट्रंप बातचीत के बाद बड़ा फैसला

इस ऐतिहासिक फैसले ने न केवल भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत दी है, बल्कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच तकनीक, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग के नए द्वार भी खोल दिए हैं। यदि यह गठबंधन सफल रहता है, तो वैश्विक तकनीकी बाजार में चीन की मोनोपॉली काफी हद तक कमजोर हो सकती है।

भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत

अमेरिकी बाजार में टैरिफ कम होने का सीधा लाभ भारत के टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स, फार्मास्युटिकल और आईटी (IT) जैसे प्रमुख क्षेत्रों को मिलेगा। अब तक भारी शुल्क के कारण भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे साबित हो रहे थे, लेकिन अब 18 प्रतिशत की नई दर से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल भारत का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

चीन के एकाधिकार को चुनौती देने की तैयारी

इस व्यापारिक सुगमता के साथ ही दोनों देश क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) के क्षेत्र में चीन के एकाधिकार को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। वॉशिंगटन डीसी में आयोजित पहली ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ बैठक इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

50 से अधिक देशों की अहम बैठक

भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिसमें 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे खनिजों की एक वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर और आधुनिक रक्षा उपकरणों के लिए अनिवार्य हैं।

जयशंकर-रुबियो वार्ता, रणनीतिक साझेदारी पर जोर

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी मुलाकात की और इस वार्ता को बेहद व्यापक बताया। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, परमाणु सहयोग, रक्षा और खनिज संसाधनों पर विस्तार से चर्चा हुई।

इंडो-पैसिफिक में भारत-अमेरिका की बढ़ती भूमिका

जयशंकर ने कहा कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी अब केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और वैश्विक आर्थिक संतुलन को प्रभावित करने वाली शक्ति बन गई है। यह साझेदारी क्वाड के उद्देश्यों को भी मजबूती प्रदान करती है, जिसका लक्ष्य एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का निर्माण करना है।

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वैश्विक राजनीति को नया आकार दे सकती है साझेदारी

ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी नवाचार को लेकर बनी यह साझा रणनीति आने वाले समय में वैश्विक राजनीति को नया आकार दे सकती है। अमेरिका इस साझेदारी को अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति का अभिन्न हिस्सा मान रहा है, जबकि भारत के लिए यह निवेश और आधुनिक तकनीक हासिल करने का एक स्वर्णिम अवसर है।

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