नई दिल्ली। भारत पर अमेरिकी टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा के साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के इस बयान ने सियासी और आर्थिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताई है। इस दावे के बाद आशंका जताई जा रही थी कि इससे वैश्विक और घरेलू स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है।
तेल कीमतों को लेकर शशि थरूर ने आशंकाएं खारिज कीं
हालांकि कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Sashi Tharoor) ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि वेनेज़ुएला के तेल की वैश्विक बाजार में वापसी से कीमतों पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील लंबे समय से थी अटकी
एक बातचीत में शशि थरूर ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील काफी समय से अटकी हुई थी और तेल के मुद्दे पर उन्हें कोई खास हैरानी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि पश्चिमी देशों द्वारा रूस, ईरान और वेनेज़ुएला पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति सीमित हो गई थी।
रूसी तेल की खरीद पहले ही हो चुकी है कम
थरूर ने कहा कि पहले भारत, पश्चिमी देशों की सहमति से रूस से तेल खरीदकर आपूर्ति संकट को संभाल पा रहा था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 50 प्रतिशत टैरिफ (Tarrif) लगाए जाने के बाद यह व्यवस्था टिकाऊ नहीं रह सकी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की रूसी तेल खरीद में पहले ही बड़ी गिरावट आ चुकी है।
वेनेज़ुएला से तेल आयात का रास्ता खुला
कांग्रेस सांसद ने कहा कि रूसी तेल पर सख्त प्रतिबंधों के चलते वेनेज़ुएला के तेल के लिए रास्ता खोलना जरूरी हो गया। उनके अनुसार जनवरी की शुरुआत में उठाए गए कदमों का उद्देश्य वेनेज़ुएला को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में दोबारा लाना था।
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भारत पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा: थरूर
शशि थरूर ने कहा कि अब अमेरिकी कंपनियां वेनेज़ुएला में तेल उत्पादन करेंगी और भारत जैसे देश वहां से तेल आयात कर सकेंगे। तेल की कीमतों को लेकर उन्होंने भरोसा जताया कि भारत पर इससे कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
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