National- भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ेगी, डीआरडीओ एस्ट्रा एमके-2 सौंपने की तैयारी में

By Anuj Kumar | Updated: February 15, 2026 • 10:24 AM

नई दिल्ली । भारत की घातक एयर-टू-एयर मिसाइल एस्ट्रा एमके-2 को जल्द ही भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के ऑपरेशनल इस्तेमाल के लिए सौंपे जाने की तैयारी है। डीआरडीओ (DRDO) ने इसके प्रोडक्शन को मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज कर दी है। बढ़ी हुई रेंज के साथ यह मिसाइल आईएएफ का प्राइमरी बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) हथियार बनने की ओर बढ़ रही है।

प्रोडक्शन मंजूरी के करीब, तैनाती का रास्ता साफ

डीआरडीओ इस साल के अंत तक एस्ट्रा एमके-2 के प्रोडक्शन की शुरुआत की तैयारी में है। इसके शामिल होने से भारत की स्वदेशी एयर कॉम्बैट क्षमताओं में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

160 से 220 किमी तक पहुंची मारक क्षमता

शुरुआती तौर पर 160 किमी रेंज के लिए डिजाइन की गई इस मिसाइल ने अपडेटेड परफॉर्मेंस इवैल्यूएशन में करीब 220 किलोमीटर तक प्रभावी क्षमता दिखाई है। इस अपग्रेड के साथ एस्ट्रा एमके-2 लंबी दूरी के हवाई युद्ध सिस्टम की एलीट कैटेगरी में शामिल हो गई है।

आईएएफ की एंगेजमेंट स्ट्रेटेजी में बड़ा बदलाव

रेंज में यह बढ़ोतरी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इससे आईएएफ की एंगेजमेंट स्ट्रेटेजी पूरी तरह बदल जाती है और अलग-अलग फाइटर प्लेटफॉर्म पर लंबी दूरी के हथियार के तौर पर इसकी भूमिका मजबूत होती है।

कई फाइटर जेट्स पर होगी तैनाती

रक्षा सूत्रों के मुताबिक एस्ट्रा एमके-2 को रूसी सुखोई Su-30MKI, मिग-29, स्वदेशी HAL तेजस Mk-1A और फ्रांसीसी राफेल (Phrance Rafel) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इंटीग्रेट किया जा रहा है। वेस्टर्न और रूसी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक सिंगल, स्टैंडर्ड BVR मिसाइल की ओर यह कदम फ्लीट-स्टैंडर्डाइजेशन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

डुअल-पल्स रॉकेट मोटर से मिली बढ़त

एस्ट्रा एमके-2 की बढ़ी हुई रेंज इसके एडवांस्ड प्रोपल्शन सिस्टम की देन है। पारंपरिक सॉलिड-फ्यूल मोटर के बजाय इसमें डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है—पहला पल्स तेज़ी लाने के लिए और दूसरा टर्मिनल फेज़ में हाई-स्पीड बनाए रखने के लिए। इससे लंबी दूरी पर भी फुर्तीले टारगेट्स को इंटरसेप्ट करने की क्षमता मिलती है, जो इसे मेटियोर और पीएल‑15 जैसे एडवांस्ड सिस्टम्स के समकक्ष रखती है।

500+ मिसाइलों का संभावित मेगा ऑर्डर

भविष्य के हवाई अभियानों में अहम भूमिका को देखते हुए आईएएफ इतिहास के सबसे बड़े सिंगल ऑर्डर्स में से एक दे सकती है—सूत्रों के मुताबिक कुल जरूरत 500 यूनिट से अधिक हो सकती है।

डुअल-मैन्युफैक्चरिंग मॉडल की तैयारी

बड़े पैमाने पर सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए डीआरडीओ सिंगल-मैन्युफैक्चरर मॉडल से हट रहा है। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के लीड इंटीग्रेटर होने की उम्मीद है, जबकि एक निजी डिफेंस फर्म दूसरी प्रोडक्शन लाइन संभाल सकती है—इससे डिलीवरी तेज और सप्लाई-चेन मजबूत होगी।

टेस्टिंग, इंटीग्रेशन और नेवी वेरिएंट

डेवलपमेंट प्रोग्राम टेस्टिंग और इंटीग्रेशन के अहम चरण में है। इस साल के अंत में तेजस Mk-1A से फायरिंग ट्रायल की योजना है—जो फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस की जरूरी शर्त है। साथ ही राफेल फ्लीट के साथ इंटीग्रेशन पर काम जारी है। इसके अलावा, मिसाइल को भारतीय नौसेना के MiG-29K के लिए भी अडैप्ट किया जा रहा है, जिससे इसका ऑपरेशनल फुटप्रिंट कैरियर-बेस्ड मैरीटाइम एविएशन तक फैल जाएगा।

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