Rahul Gandhi- राहुल गांधी के विदेश दौरों पर भारतीय दूतावास की कड़ी नजर

By Anuj Kumar | Updated: December 26, 2025 • 2:28 PM

नई दिल्ली। ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा (Chairman Saim Pitroda) ने दावा किया है कि राहुल गांधी के विदेश दौरों के दौरान भारतीय दूतावास के अधिकारी उन पर नजर रखते हैं और कई बार विदेशी नेताओं से उन्हें न मिलने की सलाह भी दी जाती है।

होटल, मीटिंग और एयरपोर्ट तक रखी जाती है नजर

पित्रोदा ने कहा कि उन्होंने खुद देखा है कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के होटल, मीटिंग्स और एयरपोर्ट (Meetings and Airport) पर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके पास इसके ठोस सबूत नहीं हैं, लेकिन अनुभव के आधार पर यह बात कही है।

बीजेपी के आरोपों को किया खारिज

सैम पित्रोदा ने बीजेपी द्वारा राहुल गांधी पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को सिरे से खारिज किया। जर्मनी दौरे की टाइमिंग को लेकर उन्होंने कहा कि विदेश यात्राएं अचानक तय नहीं होतीं, बल्कि महीनों पहले से उनका कार्यक्रम तय होता है।

“सच सच होता है, डबल स्टैंडर्ड नहीं”

राहुल गांधी पर विदेश जाकर भारत की छवि खराब करने के आरोपों पर पित्रोदा ने कहा कि सच तो सच होता है, चाहे वह भारत में बोला जाए या विदेश में। इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं हो सकता।

जॉर्ज सोरोस और विदेशी फंडिंग के आरोप बेबुनियाद

जॉर्ज सोरोस और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोपों पर सैम पित्रोदा ने कहा कि ये पूरी तरह बेबुनियाद हैं। राहुल गांधी या कांग्रेस का किसी भी तरह के एंटी-इंडिया नेटवर्क से कोई संबंध नहीं है।

हिंसा और अल्पसंख्यकों पर चिंता

क्रिसमस के दौरान चर्चों पर हमलों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर पित्रोदा ने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा की समाज में कोई जगह नहीं है। ऐसी घटनाएं भारत की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और नफरत का नतीजा हैं।

सरकारी योजनाओं और लोकतंत्र पर सवाल

पित्रोदा ने मनरेगा की जगह लाए गए जी-राम-जी कानून के नाम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पूरे देश के होते हैं, किसी एक समुदाय के नहीं। लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली पर चिंता जताते हुए उन्होंने ईवीएम, वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग पर भरोसे की कमी की बात कही।

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बांग्लादेश और पड़ोसी देशों पर बयान

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा को लेकर पित्रोदा ने कहा कि भारत को सबसे पहले अपने पड़ोस पर ध्यान देना चाहिए। यदि भारत ‘विश्व गुरु’ बनना चाहता है, तो उसे बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए नेतृत्व दिखाना होगा।

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