नई दिल्ली । भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति में जल्द ही एक और अत्याधुनिक युद्धपोत शामिल होने जा रहा है। स्वदेशी स्टील से निर्मित INS अंजदीप नौसेना (INS Anjadeep Navy) के बेड़े का हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह युद्धपोत दुश्मन की पनडुब्बियों को तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में खोजकर निष्क्रिय करने की विशेष क्षमता से लैस है।
एंटी-सबमरीन वारफेयर में नई मजबूती
आईएनएस अंजदीप भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला तीसरा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) कार्वेट है। इससे पहले INS अरनाला और INS एंड्रोथ को सेवा में शामिल किया जा चुका है। इन जहाजों का मुख्य उद्देश्य नौसेना के पुराने पड़ चुके अभय-श्रेणी के पोतों की जगह लेना और तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों को अधिक प्रभावी बनाना है।
स्वदेशी स्टील से निर्माण, ‘मेक इन इंडिया’ को बल
इस परियोजना में सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात उत्पादक कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) (सेल) की अहम भूमिका रही है। सेल ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड द्वारा बनाए जा रहे आठ कार्वेट जहाजों के लिए करीब 3,500 टन विशेष-ग्रेड स्टील (Special-grade steel) की आपूर्ति की है। यह स्टील सेल के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्थित एकीकृत इस्पात संयंत्रों में तैयार किया गया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब जटिल रक्षा उपकरणों के लिए आवश्यक उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल का उत्पादन देश में ही करने में सक्षम है।
पहले भी बड़े युद्धपोतों में रहा योगदान
सेल इससे पहले भी कई प्रमुख युद्धपोतों के लिए विशेष-ग्रेड स्टील की आपूर्ति कर चुका है, जिनमें INS विक्रांत, INS उदयगिरि, INS नीलगिरी और INS सूरत शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं।
आधुनिक तकनीक से लैस अभेद्य प्रहरी
आईएनएस अंजदीप आधुनिक रडार, उन्नत सोनार प्रणालियों और घातक हथियारों से सुसज्जित है। यह युद्धपोत तटीय सुरक्षा, निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाएगा। इसका नौसेना में शामिल होना न केवल समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का भी परिचायक बनेगा।
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