ISRO-इसरो की बड़ी कामयाबी, जापान और दक्षिण कोरिया से आगे निकला भारत

By Anuj Kumar | Updated: December 25, 2025 • 10:32 AM

नई दिल्ली,। अंतरिक्ष की रेस में भारत अब केवल भागीदार नहीं, बल्कि लीडर बनकर उभरा है। बुधवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने श्रीहरिकोटा से एक ऐसा कीर्तिमान रचा, जिसने वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की धाक और मजबूत कर दी। जहां जापान, ब्राजील और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित देश हाल के दिनों में अपने मिशन में विफल रहे, वहीं इसरो के बाहुबली एलवीएम-3 ने एक बार फिर 100 प्रतिशत सफलता का परचम लहराया।

ऐतिहासिक उड़ान, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सफलतापूर्वक लॉन्च

इसरो ने अमेरिकी कंपनी के ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट (Bluebird Block 2 Satelite) को उसकी सटीक कक्षा में स्थापित किया। यह मिशन इसरो के व्यावसायिक इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है और इससे वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की विश्वसनीयता और मजबूत हुई है।

पीएम मोदी ने दी बधाई, बताया गौरव का क्षण

इसरो की इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने वैज्ञानिकों की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे देश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि यह सफलता अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग को दर्शाती है।

दुनिया के बड़े देश हुए फेल, भारत ने दिखाई विश्वसनीयता

इसरो की यह कामयाबी इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के समय में दुनिया के कई दिग्गज देशों के अंतरिक्ष मिशन असफल हुए हैं। भारत ने कम लागत और उच्च तकनीक के तालमेल से यह साबित कर दिया है कि विश्वसनीयता किसे कहते हैं।

जापान का एच-3 रॉकेट हुआ ध्वस्त

मार्च 2023 में जापान को बड़ा झटका तब लगा, जब उसका एच-3 रॉकेट दूसरे चरण में इंजन फेल होने के कारण नष्ट हो गया। इस हादसे में जापान का कीमती एएलओएस-3 उपग्रह भी बर्बाद हो गया था।

दक्षिण कोरिया का रॉकेट 30 सेकंड में क्रैश

हाल ही में दक्षिण कोरिया का कमर्शियल रॉकेट ‘हनबिट-नैनो’ ब्राजील से लॉन्च होने के महज 30 सेकंड बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस मिशन में मौजूद पांचों सैटेलाइट समुद्र या सुरक्षित क्षेत्र में गिर गए।

ब्राजील का सबसे दर्दनाक अंतरिक्ष हादसा

अंतरिक्ष इतिहास का सबसे दुखद हादसा ब्राजील के अल्कांतारा स्पेस सेंटर में हुआ था, जब बीएलएस-1 वी03 रॉकेट लॉन्च पैड पर ही फट गया। इस हादसे में 21 वैज्ञानिकों की मौत हो गई और ब्राजील का स्पेस प्रोग्राम सालों पीछे चला गया।

एलवीएम-3 की लगातार छठी सफल उड़ान

इसरो का एलवीएम-3 रॉकेट लगातार छठी बार सफल रहा है। यही रॉकेट चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 जैसे ऐतिहासिक मिशनों को अंजाम दे चुका है। अब इसने 6100 किलोग्राम का भारी वजन उठाकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है।

सैटेलाइट-टू-फोन कनेक्टिविटी में आएगा क्रांतिकारी बदलाव

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण से दुनिया भर में मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आएगा। अब दुर्गम और दूरदराज इलाकों में भी सीधे सैटेलाइट-टू-फोन कनेक्शन संभव हो सकेगा।

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कम बजट, स्वदेशी तकनीक और शून्य के करीब विफलता दर

अंतरिक्ष विज्ञान में जोखिम हमेशा बना रहता है, लेकिन इसरो ने कठोर परीक्षणों और स्वदेशी तकनीक के दम पर विफलता की दर को लगभग शून्य कर दिया है। जहां अन्य देश अरबों डॉलर खर्च कर भी विफल हो रहे हैं, वहीं इसरो कम बजट में जटिल और ऐतिहासिक मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर रहा है।
जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में विदेशी इंजन और पुराने डिजाइनों पर निर्भरता तकनीकी खामियों का कारण बनती है, जबकि भारत ने अपने क्रायोजेनिक इंजन और रॉकेट चरणों को पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किया है।

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