New Delhi : 11 वर्ष पुराने जॉन मॉरिस फायर इंजन ने दो ट्रॉफियाँ अपने नाम कीं

By Ajay Kumar Shukla | Updated: February 9, 2026 • 10:11 PM

स्टेट्समैन विंटेज एवं क्लासिक कार रैली में शानदार उपलब्धि

नई दिल्ली। दक्षिण मध्य रेलवे (South Central Railway) के लालागुडा कार्यशाला कर्मचारियों द्वारा अत्यंत सावधानीपूर्वक संधारित ऐतिहासिक जॉन मॉरिस फायर इंजन ने 59वीं स्टेट्समैन विंटेज एवं क्लासिक कार रैली–2026 में शानदार उपलब्धि हासिल करते हुए दो प्रतिष्ठित ट्रॉफियाँ अपने नाम कीं। यह रैली नई दिल्ली में आयोजित की गई। वर्ष 1914 में निर्मित 111 वर्ष पुराना यह दुर्लभ विरासत वाहन, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में प्रदर्शित है। इस ऐतिहासिक फायर इंजन (Fire engine) को ‘इंडियन ऑयल हेरिटेज प्रिज़र्वेशन ट्रॉफी’ तथा ‘ऑटोमोटिव ट्रस्ट ब्रिटिश हेरिटेज प्रिज़र्वेशन ट्रॉफी’ से सम्मानित किया गया। स्टेट्समैन विंटेज एवं क्लासिक कार रैली का आयोजन स्टेट्समैन भवन से ग्रेटर नोएडा तक किया गया, जिसके बाद यह रैली जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम पर संपन्न हुई।

देश-विदेश के अनेक दुर्लभ एवं ऐतिहासिक वाहन हुए शामिल

कुल लगभग 90 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली इस रैली में देश-विदेश के अनेक दुर्लभ एवं ऐतिहासिक वाहन शामिल हुए। जॉन मॉरिस फायर इंजन मूल रूप से हैदराबाद शहर में तत्कालीन एच.ई.एच. निज़ाम स्टेट रेलवे द्वारा उपयोग में लाया जाता था। वर्तमान में यह राष्ट्रीय रेल संग्रहालय, नई दिल्ली की प्रमुख प्रदर्शनी का हिस्सा है। ‘इंडियन ऑयल हेरिटेज प्रिज़र्वेशन ट्रॉफी’ उस विरासत वाहन को प्रदान की जाती है, जो रैली की ऐतिहासिक भावना और संरक्षण के महत्व को सर्वश्रेष्ठ रूप से दर्शाता है। वहीं, ब्रिटिश निर्मित वाहनों के उत्कृष्ट संरक्षण एवं रखरखाव के लिए ‘ऑटोमोटिव ट्रस्ट ब्रिटिश हेरिटेज प्रिज़र्वेशन ट्रॉफी’ प्रदान की गई। इस ऐतिहासिक फायर इंजन की विशेषता यह है कि यह विश्व का एकमात्र ऐसा वाहन है, जिसमें आज भी अपने मूल शरूज़बरी एवं चैलेंजर सॉलिड टायर तथा सभी मूल अग्निशमन उपकरण सुरक्षित हैं।

जॉन मॉरिस फायर इंजन का किया निरीक्षण

इसमें अजैक्स गन-मेटल टरबाइन पंप भी स्थापित है। इसके नियमित रखरखाव का कार्य दक्षिण मध्य रेलवे, सिकंदराबाद मंडल की लालागुडा कैरिज कार्यशाला के कुशल तकनीकी कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। इससे पूर्व, 7 फ़रवरी 2026 को रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार ने जॉन मॉरिस फायर इंजन का निरीक्षण किया। उन्होंने उत्कृष्ट रखरखाव मानकों के लिए लालागुडा कार्यशाला के कर्मचारियों की सराहना करते हुए 50 हजार रुपये नकद पुरस्कार की घोषणा की। इस अवसर पर दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने भी लालागुडा कैरिज कार्यशाला टीम को बधाई दी और उनके समर्पित प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जॉन मॉरिस फायर इंजन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त यह सम्मान दक्षिण मध्य रेलवे के लिए गर्व का विषय है।

फायर इंजन क्या है?

तकनीकी रूप से फायर इंजन एक विशेष आपातकालीन वाहन होता है, जिसका उपयोग आग बुझाने, रेस्क्यू ऑपरेशन और आपदा प्रबंधन के लिए किया जाता है। इसमें पानी की टंकी, पंप, पाइप, सीढ़ियां और अग्निशमन उपकरण लगे होते हैं। फायर इंजन को प्रशिक्षित फायर फाइटर्स संचालित करते हैं और यह आग लगने की सूचना पर तुरंत घटनास्थल पहुंचता है।

क्या भारत में फायर इंजन फ्री है?

व्यवहारिक तौर पर भारत में फायर इंजन की सेवा आम नागरिकों के लिए सामान्य आग लगने की स्थिति में निःशुल्क होती है। सरकारी अग्निशमन विभाग आग बुझाने और जान-माल की सुरक्षा के लिए कोई शुल्क नहीं लेता। हालांकि औद्योगिक प्रतिष्ठानों, निजी कार्यक्रमों या विशेष सेवाओं के लिए कुछ राज्यों में निर्धारित शुल्क लिया जा सकता है।

भारत में फायर सेफ्टी कोर्स की फीस कितनी है?

शैक्षणिक रूप से भारत में फायर सेफ्टी कोर्स की फीस कोर्स की अवधि और संस्थान पर निर्भर करती है। सर्टिफिकेट कोर्स की फीस लगभग ₹10,000 से ₹30,000, डिप्लोमा कोर्स की फीस ₹40,000 से ₹1,00,000, जबकि डिग्री कोर्स की फीस ₹1 लाख से ₹3 लाख तक हो सकती है।

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