नई दिल्ली/प्रयागराज । न्यायपालिका में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस (Justice Yashwant Varma) ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब उनके खिलाफ कथित कैश विवाद को लेकर जांच और महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी।
कैश विवाद के बाद बढ़ा दबाव
जस्टिस Yashwant Varma के आधिकारिक आवास पर कथित रूप से नकदी मिलने के मामले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। इसी बीच उनका तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabd High Court) कर दिया गया था।
महाभियोग की तैयारी के बीच इस्तीफा
सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए संसद के माध्यम से उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही थी। कई सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष (Om Birla) के समक्ष प्रस्ताव भी रखा था, जिसे विचारार्थ स्वीकार कर लिया गया था। इसी के तहत उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी, लेकिन उन्होंने उससे पहले ही इस्तीफा दे दिया।
तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन
लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के निर्देश पर न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 के तहत तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था, जो आरोपों की जांच कर रही थी। इस पूरे मामले ने न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बहस तेज कर दी है।
सीजेआई स्तर पर भी हुई थी कार्रवाई
तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश Sanjiv Khanna ने मार्च में ही आरोपों की आंतरिक जांच शुरू कर दी थी और अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी थी। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को हटाने की सिफारिश भी की गई थी।
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जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी
उच्चतम न्यायालय द्वारा इस मामले से जुड़ी याचिकाएं भी खारिज की जा चुकी हैं। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित समिति में न्यायमूर्ति अरविंद कुमार जैसे वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं, जो पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।
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