Kashi ­: काशी के पर्यटन में रिकार्ड वृद्धि, पहुंचे 7 करोड़ श्रद्धालु

By Ajay Kumar Shukla | Updated: January 3, 2026 • 11:54 AM

वाराणसी। काशी के पर्यटन में रिकार्ड वृद्धि हुई है। नए साल को मनाने के लिए 7 करोड़ श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। उत्तर प्रदेश (UP) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन ने वाराणसी को न केवल आध्यात्मिक नगरी के रूप में पुनर्स्थापित किया है, बल्कि वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित किया है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के साथ गंगा घाटों (Ganga Ghats) प्राचीन मंदिरों, सड़कों और चौराहों का जिस तरह से सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाओं का व्यापक विकास हुआ है। इसका प्रमाण वर्ष 2025 में रिकार्ड 7 करोड़ 26 लाख से अधिक पर्यटकों ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किये।

मंदिर प्रबंधन कमेटी और काशी प्रशासन ने विशेष इंतजाम किये थे

वाराणसी में भव्य काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण और गंगा जी के घाटों और मंदिरों के जीर्णोद्धार के बाद काशी आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पर्यटन विभाग के अनुसार पिछले वर्ष 2025 में काशी में 7,26,76,780 पर्यटकों ने काशी के मनोरम घाटों और मंदिरों का दर्शन किया। इस आंकड़े में प्रयागराज महाकुंभ के ‘पलट प्रवाह’ के दौरान आए 2 करोड़ 87 लाख श्रद्धालुओं की संख्या भी शामिल है। जिन्होंने महाकुम्भ में त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान के बाद काशी विश्वनाथ के भी दर्शन किये। साथ ही महाशिवरात्रि पर्व और पवित्र सावन माह में काशी विश्वनाथ का दर्शन पूजन करने वालों की संख्या सर्वाधिक रही, जिसके लिए मंदिर प्रबंधन कमेटी और काशी प्रशासन ने विशेष इंतजाम किये थे

युवा पीढ़ी में धार्मिक स्थलों और तीर्थों के प्रति श्रद्धा में भी बढ़ोतरी

सीएम योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में उठी सांस्कृतिक पुनर्जागरण की लहर ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी में तीर्थों के प्रति श्रद्धा में भी बढ़ोतरी की है। इसका जीवंत प्रमाण हमें नये साल के जश्न के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों पर उमड़ी अपार भीड़ के रूप में देखने को मिला। जहां 24 दिसंबर 2025 से 01 जनवरी 2026 के दौरान 3075769 श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए। इस संबंध में काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने विश्व भूषण मिश्र ने कहा कि सनातन संस्कृति उत्सव, उत्साह एवं उल्लास की आश्रयस्थली है। विश्व के समस्त उत्सव सनातन मान्यता में उत्कर्ष प्राप्त करते हैं। उत्सवों में प्रायः लोक तात्कालिक सत्ता के आचरण को प्रतिबिंबित करता है। अतः स्वाभाविक ही है कि वर्तमान काल में प्रत्येक पर्व पर चाहे वह भारतीय हो अथवा पश्चिम का पर्व, सनातन आस्था के केंद्रों पर श्रद्धालुओं का प्रवाह अभूतपूर्व है।

बनारस के गंगा जल क्यों नहीं लाया जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार गंगा माँ स्वयं भक्तों तक पहुँचती हैं, इसलिए बनारस (वाराणसी) का गंगाजल विशेष रूप से लाया नहीं जाता, बल्कि श्रद्धालु स्वयं काशी आकर गंगा स्नान व जल ग्रहण करते हैं। यह भी माना जाता है कि काशी में गंगाजल कभी अशुद्ध नहीं होता और इसका धार्मिक महत्व स्थान से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे वहीं से ग्रहण करना श्रेष्ठ माना जाता है।

वाराणसी का पुराना नाम क्या था?

वाराणसी का सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध नाम काशी है।
इसके अलावा इसे बनारस और अविमुक्त क्षेत्र भी कहा जाता रहा है।

Read Telugu News: https://vaartha.com/

यह भी पढ़ें :

#GlobalTourismHub #Hindi News Paper #KashiVishwanathCorridor #SpiritualTourism #UPDevelopment #Varanasi breakingnews latestnews