Lands for Jobs Case- आज कोर्ट में पेश होंगे लालू –राबड़ी, 41 आरोपियों पर टिकी नजरें

By Anuj Kumar | Updated: February 16, 2026 • 9:27 AM

पटना/नई दिल्ली । ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में होने वाली सुनवाई ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और राबड़ी देवी (Rabdi Devi) रविवार शाम पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। इस बहुचर्चित केस में अदालत पहले ही 41 आरोपियों पर आरोप तय कर चुकी है, जिससे मामला अब सीधे ट्रायल की दहलीज पर खड़ा है।

41 आरोपियों पर पहले ही तय हो चुके हैं आरोप

इस केस में लालू-राबड़ी के साथ उनके परिवार के कई सदस्य भी आरोपी हैं। तेजप्रताप यादव (Tejpratap Yadav) तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव का नाम भी आरोपियों की सूची में शामिल है। अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद सभी पक्षों की धड़कनें तेज हैं और सियासी गलियारों में इसे बेहद अहम सुनवाई माना जा रहा है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी से बढ़ा सियासी दबाव

पिछली सुनवाई के दौरान स्पेशल जज विशाल गोग्ने की सख्त टिप्पणी ने मामले को और गंभीर बना दिया था। अदालत ने कहा था कि सरकारी नौकरी के बदले संपत्ति लेने की एक सोची-समझी साजिश रची गई। टिप्पणी में “आपराधिक गिरोह” जैसे शब्दों का इस्तेमाल होने से राजनीतिक दबाव और बढ़ गया।
हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि आरोप तय होना दोष सिद्धि नहीं है और बचाव पक्ष को ट्रायल में पूरा अवसर मिलेगा।

CBI की चार्जशीट पर अदालत की सहमति

अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट पर विचार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप बनते हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, रेल मंत्री कार्यकाल के दौरान जमीन ट्रांसफर और कीमतों में असामान्यता के संकेत मिले हैं। कोर्ट ने अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश भी दिए हैं।

2004–2009 के लेन-देन की होगी गहन जांच

CBI का दावा है कि यह कथित साजिश 2004 से 2009 के बीच रची गई, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि कई रेलवे जोनों में ग्रुप-डी नियुक्तियों से पहले जमीन गिफ्ट डीड या अन्य तरीकों से ट्रांसफर कराई गई। ट्रायल के दौरान इन सभी दस्तावेजों और गवाहों की गहन जांच की जाएगी।

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सियासत और कानून के मोड़ पर मामला

अब यह केस पूरी तरह ट्रायल की राह पर है। बचाव पक्ष CBI के साक्ष्यों को चुनौती देगा, जबकि दोषसिद्धि की स्थिति में ऊपरी अदालतों का रास्ता खुला रहेगा। लालू परिवार पहले ही इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता चुका है। आज की सुनवाई को इस बहुचर्चित मामले में अगला बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिसका असर बिहार की राजनीति पर भी साफ नजर आ सकता है।

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