పట్టాలు తప్పిన రైలు పట్టాలు తప్పిన చెన్నై ఎక్స్ ప్రెస్ రైలు నేటి నుంచి భారత్ ట్యాక్సీ సేవలు రికార్డు స్థాయికి చేరిన భారత్-చైనా ట్రేడ్ క్రీడా సంఘాల పాలనపై సుప్రీం కోర్టు కీలక వ్యాఖ్యలు ఉచిత పథకాలపై ఆర్థిక సర్వే హెచ్చరిక ముగిసిన అజిత్ పవార్ అంత్యక్రియలు ప్రపంచ దేశాలకు భారత్ షాక్ నేటి నుంచి పార్లమెంట్ బడ్జెట్ సమావేశాలు మహారాష్ట్ర డిప్యూటీ సీఎం అజిత్ పవార్ దుర్మరణం పట్టాలు తప్పిన రైలు పట్టాలు తప్పిన చెన్నై ఎక్స్ ప్రెస్ రైలు నేటి నుంచి భారత్ ట్యాక్సీ సేవలు రికార్డు స్థాయికి చేరిన భారత్-చైనా ట్రేడ్ క్రీడా సంఘాల పాలనపై సుప్రీం కోర్టు కీలక వ్యాఖ్యలు ఉచిత పథకాలపై ఆర్థిక సర్వే హెచ్చరిక ముగిసిన అజిత్ పవార్ అంత్యక్రియలు ప్రపంచ దేశాలకు భారత్ షాక్ నేటి నుంచి పార్లమెంట్ బడ్జెట్ సమావేశాలు మహారాష్ట్ర డిప్యూటీ సీఎం అజిత్ పవార్ దుర్మరణం

National- H-1B वीजा नियमों में बड़ा बदलाव, अब सैलरी के आधार पर होगा चयन

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: March 18, 2026 • 10:35 AM
వాట్సాప్‌లో ఫాలో అవండి

नई दिल्ली। अमेरिका ने H-1B वीजा (H-1B Visa) प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए चयन प्रणाली को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। अब तक इस वीजा के लिए उम्मीदवारों का चयन रैंडम लॉटरी सिस्टम (Random Lautery System) से होता था, लेकिन नई व्यवस्था में वेतन (Salary) को आधार बनाया जाएगा। इस बदलाव को 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाएगा, जिसके बाद उच्च वेतन पाने वाले प्रोफेशनल्स को वीजा मिलने की संभावना ज्यादा होगी।

लॉटरी सिस्टम खत्म, सैलरी बेस्ड चयन लागू

अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ने इसके लिए फार्म I-129 का नया सिस्टम तैयार किया है। अब कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन करते समय नौकरी से जुड़ी विस्तृत जानकारी और वेतन का पूरा विवरण देना होगा।नई व्यवस्था में आवेदकों को चार अलग-अलग वेतन स्तरों (लेवल-1 से लेवल-4) में बांटा जाएगा और चयन इन्हीं स्तरों के आधार पर होगा।

किसे कितना मिलेगा मौका?

नए नियमों के अनुसार, जितना ज्यादा वेतन स्तर होगा, चयन की संभावना उतनी ही अधिक होगी—

इसका मतलब है कि अब अनुभव और उच्च वेतन वाले उम्मीदवारों को ज्यादा मौके मिलेंगे, जबकि एंट्री लेवल प्रोफेशनल्स के लिए रास्ता थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

भारतीय प्रोफेशनल्स पर बड़ा असर

H-1B वीजा का सबसे ज्यादा फायदा भारतीयों को मिलता रहा है। हर साल जारी कुल वीजा में करीब 70% हिस्सेदारी भारतीय प्रोफेशनल्स की होती है। ऐसे में इस नए बदलाव का सीधा असर भारत के आईटी और टेक सेक्टर के कर्मचारियों पर पड़ सकता है, खासकर फ्रेशर्स और कम अनुभव वाले इंजीनियरों पर।

वीजा फीस में भारी बढ़ोतरी

वीजा नियमों के साथ-साथ फीस में भी जबरदस्त इजाफा किया गया है। पहले जहां H-1B वीजा की फीस करीब 9 हजार डॉलर (लगभग 8.3 लाख रुपये) थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 1 लाख डॉलर (करीब 90 लाख रुपये) कर दिया गया है। इससे कंपनियों और आवेदकों दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

वीजा अवधि और ग्रीन कार्ड का रास्ता

H-1B वीजा आमतौर पर 3-3 साल के दो चरणों में दिया जाता है, यानी कुल 6 साल तक अमेरिका में काम करने की अनुमति मिलती है। इसके बाद आवेदक ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं, जो स्थायी निवास की दिशा में अगला कदम होता है।

कंपनियों और ग्लोबल टैलेंट पर असर

अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां जैसे इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और एचसीएल टेक इस वीजा की प्रमुख स्पॉन्सर रही हैं। भारत हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियर और आईटी प्रोफेशनल्स तैयार करता है, जो अमेरिकी टेक इंडस्ट्री की रीढ़ माने जाते हैं। हालांकि फीस बढ़ने और नियम सख्त होने से यह संभावना भी बढ़ गई है कि भारतीय प्रतिभाएं अब यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मिडिल ईस्ट जैसे विकल्पों की ओर रुख करें।

नए वीजा कार्ड की भी घोषणा

इसके साथ ही अमेरिका ने “ट्रम्प गोल्ड कार्ड”, “ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड” और “कॉर्पोरेट गोल्ड कार्ड” जैसे नए विकल्प भी पेश किए हैं। इनमें “ट्रम्प गोल्ड कार्ड” (करीब 8.8 करोड़ रुपये) धारक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का अधिकार दे सकता है, जो अमीर निवेशकों और हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स को आकर्षित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह बदलाव अमेरिका की इमिग्रेशन नीति में एक बड़ा मोड़ है, जो अब “लकी ड्रॉ” से हटकर “हाई स्किल और हाई सैलरी” को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Read More :

# Green Card News # Salary News #Breaking News in Hindi #Global Talent News #H-1B visa News #Hindi News #Latest news #Middile East News #Random Lautery System News #salary Based News #Visa Fees News

గమనిక: ఈ వెబ్ సైట్ లో ప్రచురించబడిన వార్తలు పాఠకుల సమాచార ప్రయోజనాల కోసం ఉద్దేశించి మాత్రమే ఇస్తున్నాం. మావంతుగా యధార్థమైన సమాచారాన్ని ఇచ్చేందుకు కృషి చేస్తాము.