National- केंद्र का बड़ा फैसला- सरकारी वकीलों की फीस बढ़ी, अधिसूचना जारी

By Anuj Kumar | Updated: February 9, 2026 • 12:42 AM

नई दिल्ली,। केंद्र सरकार ने अदालतों में सरकार (Government) की ओर से पैरवी करने वाले वकीलों को बड़ी राहत देते हुए उनकी फीस में बढ़ोतरी कर दी है। लगभग 11 साल बाद यह संशोधन किया गया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय (Union Law Ministry) ने 5 फरवरी को इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है, जिसके तहत विभिन्न श्रेणियों के सरकारी वकीलों को अब पहले की तुलना में काफी अधिक पारिश्रमिक मिलेगा।

‘ए’, ‘बी’ और ‘सी’ श्रेणी के वकीलों की फीस में बड़ा इजाफा

अधिसूचना के अनुसार, नियमित अपील (Appeal) और अंतिम सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश होने वाले ‘ए’ श्रेणी के वकीलों को अब प्रति मामले में प्रति दिन 21,600 रुपये का भुगतान किया जाएगा। वहीं ‘बी’ और ‘सी’ श्रेणी के वकीलों को 14,400 रुपये प्रति दिन मिलेंगे। इससे पहले ‘ए’ श्रेणी के वकीलों को 13,500 रुपये और ‘बी’ व ‘सी’ श्रेणी के वकीलों को 9,000 रुपये प्रति दिन फीस मिलती थी।

2015 के बाद पहली बार हुआ फीस संशोधन

सरकारी वकीलों की फीस में यह संशोधन अक्टूबर 2015 के बाद पहली बार किया गया है। कानून मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी केवल नियमित अपील और अंतिम सुनवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रकार के मामलों, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के साथ बैठकों (कॉन्फ्रेंस) और सलाह-मशविरा करने की फीस में भी संशोधन किया गया है। इसके अलावा, दिल्ली और राज्यों की राजधानियों में पेश होने वाले वकीलों की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है।

महंगाई और बढ़ते खर्च को देखते हुए लिया गया फैसला

कानून मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि महंगाई, कानूनी पेशे से जुड़े बढ़ते खर्च और योग्य पेशेवरों को बनाए रखने की जरूरत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अधिकारी के अनुसार, लंबे समय से सरकारी वकीलों की ओर से फीस बढ़ाने की मांग की जा रही थी, जिसे अब पूरा किया गया है।

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पूर्व विधि सचिव अंजू राठी राणा ने फैसले का किया स्वागत

पूर्व केंद्रीय विधि सचिव और वर्तमान में विधि आयोग की सदस्य सचिव अंजू राठी राणा ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि केंद्र सरकार के वकीलों के लिए फीस संशोधन की अधिसूचना अब लागू हो गई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला एक दशक से अधिक समय से लंबित था और अदालतों में केंद्र सरकार का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह बेहद जरूरी कदम है। इस फैसले के बाद देशभर के सरकारी वकीलों में संतोष और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

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