Latest Hindi News : न्यूयॉर्क के ममदानी-नई सोच के समाजवादी, भारत के लिए सीख

By Anuj Kumar | Updated: November 10, 2025 • 12:01 PM

नई दिल्ली। न्यूयॉर्क शहर के नए मेयर जोहरान ममदानी (Johran Mamdan) आज वैश्विक समाजवादी राजनीति के नए प्रतीक बनकर उभरे हैं। भारतीय फिल्म निर्माता मीरा नायर (Meera Nair) के बेटे और युगांडा में जन्मे ममदानी अब अमेरिका में कार्यकारी पद पर चुने गए सबसे प्रमुख डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट हैं। उन्होंने दक्षिण एशियाई अप्रवासी समुदायों के बीच हिंदी और बंगाली में प्रचार कर यह दिखाया कि स्थानीय जुड़ाव राजनीति की सबसे मजबूत नींव हो सकता है।

पूंजीवाद की आलोचना और लोकतंत्र की नई परिभाषा

भारतीय मूल के ममदानी का राजनीतिक दर्शन पारंपरिक पूंजीवाद की आलोचना पर आधारित है। उनका मानना है कि लोकतंत्र केवल वोटिंग तक सीमित नहीं, बल्कि कार्यस्थल और अर्थव्यवस्था तक विस्तारित होना चाहिए। उनकी नीतियों का केंद्र आम लोगों की बुनियादी जरूरतें हैं , जैसे सस्ती आवास व्यवस्था, मुफ्त सार्वजनिक बसें, किराया नियंत्रण का विस्तार और फ्री चाइल्ड केयर (Free Child Care)। इन योजनाओं ने उन लोगों को राहत दी जो महंगाई और ऊंचे किराए से जूझ रहे हैं।

आलोचनाओं के बीच स्थानीय मुद्दों पर फोकस

हालांकि विरोधियों ने ममदानी को इजरायल नीति और वैचारिक रुख के कारण चरमपंथी बताने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बहस को हमेशा स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रखा। उन्होंने यह साबित किया कि जमीनी राजनीति किसी भी नैरेटिव या प्रचार से कहीं ज्यादा प्रभावशाली होती है।

वामपंथ के लिए नया सबक

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जोहरान ममदानी की जीत इस बात का प्रमाण है कि समाजवाद अब इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति हो सकता है। यह 21वीं सदी की वर्ग-आधारित राजनीति की वापसी है, जो पहचान या विचारधारा नहीं, बल्कि आर्थिक वास्तविकताओं से प्रेरित है। ममदानी ने लोगों को समुदायों में नहीं, बल्कि श्रमिकों और नागरिकों के रूप में संबोधित किया — यही उनकी सफलता की असली कुंजी बनी।

भारत के लिए संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत जैसे विकासशील देश, जहां राजनीति अक्सर धर्म और पहचान के इर्द-गिर्द घूमती है, वहां ममदानी का मॉडल एक नई दिशा दिखाता है। यह बताता है कि जनकल्याण, रोजगार, आवास और समान अवसर पर केंद्रित समाजवादी राजनीति वैश्विक पूंजीवाद के बीच भी सफल हो सकती है। भारत में युवाओं के बढ़ते प्रभाव, तकनीकी पहुंच और सामाजिक असमानता के बीच ममदानी जैसा व्यावहारिक समाजवाद असरदार साबित हो सकता है।

वामपंथ की नई पहचान

न्यूयॉर्क जैसे जटिल शहर में सुधार लागू करना आसान नहीं होगा, लेकिन ममदानी ने यह दिखा दिया है कि वामपंथ केवल विरोध नहीं, बल्कि रचनात्मक शासन का भी नाम है। उनकी सफलता या असफलता यह तय करेगी कि भविष्य का समाजवाद कितनी दूर तक जा सकता है — अमेरिका में भी और भारत के लिए भी

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