News Hindi : मिशन शक्ति ने बदली तस्वीर, यूपी में महिला सुरक्षा बनी सुशासन की पहचान

By Ajay Kumar Shukla | Updated: November 30, 2025 • 10:34 AM

महिलाओं की शिकायतों में 60 प्रतिशत कमी, आत्मरक्षा प्रशिक्षण से मिला आत्मविश्वास

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को नई ऊंचाई देने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath government) की पहल ‘मिशन शक्ति (Mission Shakti) ’ अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और साहस का प्रतीक बन चुकी है। जिस प्रदेश में कभी महिलाएँ घर से अकेले निकलने में संकोच करती थीं, वहीँ अब सुरक्षा उत्तर प्रदेश की नई पहचान बन गई है। सरकार की इस पहल ने सामाजिक सोच में बड़ा परिवर्तन लाया है, जिससे महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में अधिक स्वतंत्रता और सुरक्षा का अनुभव हो रहा है। यह अभियान राज्य में सकारात्मक बदलाव का मजबूत आधार बन रहा है।

आत्मरक्षा प्रशिक्षण और कमांडो टीमों ने बढ़ाई क्षमता

मिशन शक्ति का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मरक्षा में सक्षम बनाना है। प्रदेश भर में पाँच लाख से अधिक महिलाओं को विशेष आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में अपनी रक्षा कर सकें। फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क और मिशन शक्ति कमांडो टीमें हर जिले में सक्रिय हैं, जो आपात स्थितियों में त्वरित सहायता प्रदान करती हैं। यह व्यवस्था महिलाओं को न केवल सुरक्षा देती है, बल्कि उनमें यह भावना भी मजबूत करती है कि वे अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित कर सकती हैं। अभियान के चलते महिलाओं की प्रतिस्पर्धात्मक व मानसिक क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पिंक बूथ और एंटी रोमियो स्क्वाड से मिली सड़क सुरक्षा

शहरी क्षेत्रों में महिला सुरक्षा मजबूत करने में पिंक बूथ और एंटी रोमियो स्क्वाड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ और उत्पीड़न जैसे अपराधों में भारी कमी दर्ज की गई है। रिपोर्टों के अनुसार महिलाओं से संबंधित सुरक्षा शिकायतों में 60 प्रतिशत तक गिरावट आई है, जो इस पहल की प्रभावशीलता को दर्शाती है। इन टीमों की नियमित गश्त और निगरानी ने सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक परिवहन को महिलाओं के लिए और अधिक सुरक्षित बनाया है। यह पहल न केवल सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि महिलाओं के मन से भय और असुरक्षा की भावना भी समाप्त कर रही है।

घरेलू हिंसा पर कठोर कार्रवाई और संवेदनशील तंत्र

घरेलू हिंसा और यौन अपराधों के खिलाफ अब तेज और सख्त कार्रवाई की जा रही है। शिकायत दर्ज करने से लेकर सहायता उपलब्ध कराने तक एक पारदर्शी व संवेदनशील व्यवस्था बनाई गई है। महिला बीट अधिकारी, मिशन शक्ति केंद्र तथा कानून-व्यवस्था तंत्र मिलकर पीड़ितों को राहत देते हैं। दिसंबर 2024 तक 1663 थानों में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, जहाँ महिलाओं की शिकायतों का त्वरित निस्तारण होता है। महिलाओं को अब यह विश्वास मिल रहा है कि सुरक्षा किसी उपकार की तरह नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है। यही व्यवस्था प्रदेश में न्याय की नई उम्मीद जगाती है।

फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क से बढ़ी आपातकालीन सहायता

महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने में फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क, 1090 वीमेन पावर लाइन और 112 की त्वरित पुलिस सहायता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये सेवाएँ आपात स्थिति में तुरंत संपर्क और मदद सुनिश्चित करती हैं। सार्वजनिक स्थानों पर 3 लाख से अधिक लोगों को चेतावनी दी गई और 3972 असामाजिक तत्व गिरफ्तार हुए, जिससे अनुशासन और सुरक्षा में बड़ा सुधार हुआ है। यह सुव्यवस्थित नेटवर्क महिलाओं को यह भरोसा देता है कि किसी भी संकट की स्थिति में सहायता तुरंत उपलब्ध होगी। यही कारण है कि मिशन शक्ति अब एक सरकारी योजना से आगे बढ़कर सामाजिक परिवर्तन का जनआंदोलन बन चुका है।

यूपी में महिलाओं के लिए कौन-सी योजना चल रही है?

उत्तर प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए कई प्रमुख योजनाएँ चल रही हैं, जिनमें मिशन शक्ति, 1090 वीमेन पावर लाइन, महिला हेल्पडेस्क, महिला कल्याण निगम की सहायता योजनाएँ, कन्या सुमंगला योजना, महिला सुरक्षा कमांडो टीमें और साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। इन योजनाओं का लक्ष्य सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान को बढ़ाना है।

उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा अभियान क्या है?

UP का मुख्य महिला सुरक्षा अभियान मिशन शक्ति है। इसके तहत महिलाएँ आत्मरक्षा प्रशिक्षण, पिंक बूथ, एंटी रोमियो स्क्वाड, फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क, 1090 और 112 जैसी त्वरित सहायता सेवाओं से जुड़ी हैं। यह अभियान महिलाओं की सुरक्षा, जागरूकता, कानूनी सहायता और मानसिक रूप से मजबूत बनाने पर केंद्रित है, जिससे पूरे राज्य में सुरक्षित माहौल बनाया जा सके।

महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित जिला कौन-सा है?

किसी एक जिले को “सबसे सुरक्षित” बताना आधिकारिक रूप से तय मानकों पर निर्भर करता है, लेकिन सुरक्षा आंकड़ों, कानून-व्यवस्था और महिला-संबंधी शिकायतों में कमी के आधार पर लखनऊ, गोरखपुर, नोएडा और वाराणसी आमतौर पर अधिक सुरक्षित माने जाते हैं। इन जिलों में पुलिस रिस्पॉन्स तेज, निगरानी मजबूत और महिला-केंद्रित सुरक्षा सेवाएँ सबसे सक्रिय रहती हैं।

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