केंद्रपाड़ा, 19 अगस्त 2025: ओडिशा (Odisa) के केंद्रपाड़ा जिले में ब्राह्मणी नदी की एक सहायक नदी (गलिया नाला) में रविवार, 17 अगस्त 2025 को 73 भैंसों के शव (AUL-Cattle-Death) तैरते पाए गए, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में दहशत फैल गई। यह घटना आउल ब्लॉक के एकमानिया गाँव में हुई, जहां तीन स्थानीय पशुपालकों—गणेश दास, जगन्नाथ दास और परमानंद बिस्वाल—की 88 भैंसों में से 73 की मौत हो गई।
इस घटना ने पशुपालकों की आजीविका को गंभीर संकट में डाल दिया है, क्योंकि ये परिवार भैंसों के दूध बेचकर अपनी जीविका चलाते थे। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की एक टीम तैनात की गई है।
क्या हुआ और संदिग्ध कारण
घटना रविवार सुबह 8 बजे के आसपास हुई, जब गणेश दास (40 भैंसें), जगन्नाथ दास (17 भैंसें) और परमानंद बिस्वाल (16 भैंसें) की भैंसें गलिया नाले के पास चरने गई थीं। यह नाला ब्राह्मणी नदी की दक्षिणी शाखा से जुड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, भैंसें रोज़ाना इस नाले के पास चरने जाती थीं, लेकिन इस बार वे गहरे और संकरे पानी में प्रवेश कर गईं, जहां अधिकांश डूब गईं। केवल 15 भैंसों को बचाया जा सका। ग्रामीणों ने नावों का उपयोग कर 44 शवों को निकाला, जबकि कुछ शव अभी भी लापता हैं। मौत के कारणों को लेकर कई संदिग्ध बातें सामने आई हैं:
1. मगरमच्छ का हमला: कुछ ग्रामीणों का मानना है कि मगरमच्छों के हमले के कारण भैंसें डरकर गहरे पानी में चली गईं। केंद्रपाड़ा के पास भितरकनिका नेशनल पार्क में मगरमच्छों की मौजूदगी के कारण पहले भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं। पशु चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि तीन मगरमच्छों के दिखने से भगदड़ मचने की संभावना है, जिसके कारण भैंसें डूब गईं।
2. ज़हरीला पानी: स्थानीय लोगों ने संदेह जताया है कि पास के झींगा फार्मों से रासायनिक कीटनाशकों के कारण नाले का पानी ज़हरीला हो सकता है। कुछ का कहना है कि मछली मारने के लिए मछुआरों द्वारा डाले गए ज़हर ने भैंसों की मौत का कारण बना।
3. मजबूत धारा और कीचड़: कुछ का मानना है कि नाले की गहराई, मजबूत धारा और कीचड़ भरे पानी में फंसने के कारण भैंसें डूब गईं। पशु चिकित्सा अधिकारियों और कटक के पशु रोग अनुसंधान संस्थान (ADRI) की एक टीम ने सोमवार को एकमानिया गाँव का दौरा किया।
कई शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया, लेकिन शवों पर कोई चोट के निशान नहीं मिले। नाले के पानी के नमूने प्रयोगशाला विश्लेषण के लिए भेजे गए हैं ताकि ज़हर की मौजूदगी की पुष्टि हो सके। केंद्रपाड़ा के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मनोज कुमार पटनायक ने कहा, “हम मौतों की सटीक संख्या और कारणों की पुष्टि के लिए काम कर रहे हैं।”
पशुपालकों का नुकसान और मुआवजे की माँग
इस घटना ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक रूप से तबाह कर दिया है। गणेश दास, जिन्होंने 40 भैंसें खोईं, ने कहा, “मैं महीने में दूध बेचकर 30,000 रुपये कमाता था। अब मेरी आजीविका खत्म हो गई है। सरकार से उचित मुआवजे की माँग करता हूँ।” जगन्नाथ दास और परमानंद बिस्वाल ने भी सरकार से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।
स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित पशुपालकों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है, लेकिन राशि और समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह ओडिशा में अपनी तरह की पहली घटना है, क्योंकि भैंसें नियमित रूप से इस नाले के पास चरती थीं और पहले कभी ऐसी त्रासदी नहीं हुई। ग्रामीणों में डर का माहौल है, और वे पानी की गुणवत्ता और मगरमच्छों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंतित हैं।
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